मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और इनोवेटर सोनम वांगचुक अब लद्दाख में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने देश के स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले 'आजादी की दूसरी लड़ाई' शुरू करने की बात कही है। उनका कहना है कि भले ही शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे दिया लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा है कि अब बारी है कि ऐसे नेताओं को आगे लाया जाए जो देश को सच में रास्ता दिखा पाएं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में एक शांतिपूर्ण क्रांति और बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है।

 

जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के बाद लद्दाख लौट चुके सोनम  वांगचुक ने वीडियो जारी करके सभी पार्टियों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वह जितना सोचते हैं, उतनी ही निराशा होती है। अब वह देश के युवाओं से अफील कर रहे हैं कि वे सही नेताओं को चुनने की दिशा में काम करें। उन्होंने देश के बुद्धिजीवियों को एकसाथ लाने और उनके सुझावों को सुनने की पहल शुरू करने की बात कही है।   

सोनम वांगचुक के वीडियो में क्या है?

सोनम वांगचुक ने एक वीडियो जारी करके कहा है, '15 अगस्त आ रहा है और मुझे आपसे मदद चाहिए। पिछले दिनों मैं बीमार रहा और बिस्तर पर बैठकर अपने देश और उसके भविष्य के बारे में सोचता रहा। मैं जितना ही सोचता, उतना ही निराश होता रहा। 50 साल पहले पड़ोसी देश जो हमसे पीछे थे या बराबर के थे, वे आज हमसे मीलों दूर आगे निकल चुके हैं। बड़े देशों की बात ना करें तो थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनिशिया और यहां तक कि श्रीलंका और बांग्लादेश भी हमसे प्रति व्यक्ति आय के मामले में आगे हैं। ऐसा ही चलता रहा तो 2047 में हम विकसित देश नहीं, दुनिया के बाजार में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।'

उन्होंने आगे कहा, 'आप लोगों को मैं बधाई देना चाहता हूं कि आप लोगों ने परिवर्तन चाहा और पिछले दो महीने में आंदोलन किए और बदलाव आया भी। शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया लेकिन जो अगले शिक्षामंत्री आए उनसे भी कोई चमत्कार होता नहीं दिख रहा है। जब तक शिक्षा पिछड़ी रहेगी देश का भविष्य भी पिछड़ा ही रहेगा। वैसे ही अगर दिल्ली में एक पार्टी की सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और उसने बर्बरता से दबाया तो दूसरे राज्यों में दूसरी पार्टी की सरकारों ने भी वही किया। पार्टी की बात नहीं है। 2012-13 में एक सरकार को भ्रष्टाचार के आंदोलन में हमने बदल दिया लेकिन आज 12-13 साल बाद भ्रष्टाचार ने रूप बदल लिया।'

क्या चाहते हैं सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक ने एक अलग तरह के प्रदर्शन का आह्वान करते हुए कहा है, 'एक बहुत बड़ा परिवर्तन चाहिए। एक शांतिपूर्ण क्रांति चाहिए ताकि हम सही नेताओं को आगे बढ़ा सकें क्योंकि सबसे बड़ी कमी हमारे नेतृत्व को चुनने में रही है। जब तक नेता सही ना हो, तो पूरा देश गलत रास्ते पर चलेगा। इन हालात के बावजूद बहुत सारे ऐसे नेता हैं जो सही रास्ते पर चलते हैं। ऐसे नेताओं को मैं सलाम करता हूं। मगर आपको मालूम है कि हमारी संसद को ही लें तो लगभग आधे सांसदों पर अपराधों के केस और आरोप हैं। एक तिहाई पर तो गंभीर आरोप हैं, मर्डर, रेप और किडनैपिंग के। ऐसे में देश विकसित कैसे बने?'

 

हर पार्टी पर सवालिया निशान खड़े करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा है, 'मैं किसी खास पार्टी, पक्ष या विपक्ष की बात नहीं कर रहा हूं। मैं देश की बात कर रहा हूं। देश में एक बड़े बदलाव और शांतिपूर्ण क्रांति की जरूरत है ताकि आने वाले समय में चुनाव में वे नेता आगे जाएं जो सच में देश को रास्ता दिखा पाएं। इसलिए मैं हमारे देश के बुद्धिजीवियों को एक मंच पर लाना चाहता हूं, उनसे सलाह और सुझाव लेना चाहता हूं। यहां लद्दाख में बैठकर मैं नहीं जानता हूं कि वे कौन हैं और कहां हैं। मुझे आप ऐसे नाम सुझाएं जो हमारे देश का नया नक्शा बनाने में मदद कर सकते हैं। इसके लिए मैं आपके शहर में भी आना चाहूंगा।'