देश के कई राज्यों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। सरकार ने चीनी की कीमतें को काबू में रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को थोक खरीदारों पर चीनी रखने की सीमा तय कर दी है। कच्ची चीनी के आयात को भी आसान बना दिया है। देश में चीनी की कीमतों में तेज उछाल आया है और त्योहारों का मौसम भी नजदीक आ रहा है। 

सरकार के आदेश के मुताबिक, कोई भी थोक उपभोक्ता जो महीने में औसतन 10 मीट्रिक टन या उससे ज्यादा चीनी इस्तेमाल करता है, वह अपनी जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेगा। सरकार का आदेश मिठाई बनाने वाले हलवाई से लेकर सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियां, फूड प्रोसेसिंग उद्योग, मिठाई बेचने वाले और दूसरे बड़े संस्थागत खरीदार शामिल हैं। 

ऐसे खरीदार चीनी को 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक में नहीं रख सकेंगे। यानी जितनी चीनी वे महीने में इस्तेमाल करते हैं, उसका सिर्फ 15 दिन का हिस्सा ही उनके पास रह सकेगा। सरकारी संस्थानों पर यह नियम लागू नहीं होगा। 

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सरकार क्यों नजर रखेगी?

सरकार यह भी जांच करेगी कि मिलों से थोक खरीदारों को कितनी चीनी बिक रही है। इसके लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) रिटर्न और चीनी से जुड़े एचएसएन कोड का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे यह साफ पता चल जाएगा कि कौन कितनी चीनी खरीद और इस्तेमाल कर रहा है।

कच्ची चीनी पर सरकार ने क्या फैसला लिया?

वाणिज्य मंत्रालय ने एक और फैसला लिया है। अक्टूबर 2026 के अंत तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी है। यह आयात टैरिफ रेट कोटा के तहत होगा। इससे देश में चीनी की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतें थम सकती हैं।

 

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चीनी की कीमतें एक महीने में 15 फीसदी बढ़ीं 

चीनी की कीमतों में पिछले एक महीने में करीब 15 फीसदी का उछाल आया है। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त को खुदरा कीमत 5,152 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। एक महीने पहले यह 4,476 रुपये प्रति क्विंटल थी और एक साल पहले 4,305 रुपये प्रति क्विंटल थी। त्योहारों से पहले यह बढ़ोतरी आम लोगों और व्यवसायों दोनों की चिंता बढ़ा रही है।

सरकार ने 15 दिनों की स्टॉक लिमिट क्यों तय की है?

सरकार का यह दोतरफा कदम कीमतों पर अंकुश लगाने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टॉक की सीमा लगाने से जमाखोरी रुकेगी और आयात से अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी, जिससे बाजार स्थिर हो सकता है।

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चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं, विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्षी नेताओं ने चीनी के बढ़ते दाम की वजह E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग बताई है। चीनी की कीमतें करीब 20 रुपये प्रति किलो बढ़ गईं हैं। अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्र सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति को जिम्मेदार ठहराया है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि तेल आयात पर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गन्ने से एथेनॉल बनाने से चीनी की कमी हो गई, जिससे कीमतें 46 रुपये से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं। उन्होंने आरोप लगाया है कि करीब 30 लाख टन चीनी के बराबर गन्ने का डायवर्जन हुआ, जिससे पहले निर्यातक देश अब आयात करने को मजबूर है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी सरकार को चीनी के बढ़ते दाम पर घेरा है।