तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले 20 सांसदों ने एलान किया है कि वे नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में अपने धड़े का विलय कर रहे हैं। इस बारे में बागी गुट ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी जानकारी दे दी है। अब NCPI के ही एक नेता ने टीएमसी के बागी सांसदों को पार्टी में शामिल किए जाने का विरोध किया है। पार्टी के संगठन महासचिव शांतनु डे ने कहा है कि ये लोग गलत काम करके आए हैं इसलिए इन्हें पार्टी में लेना सही नहीं है। उधर अभी तक NCPI की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। 

 

इस पार्टी के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। साल 2023 में त्रिपुरा में हुए चुनावों के दौरान जो पोस्टर लगाए गए थे, उनके मुताबिक शेवली कुंडू पार्टी की अध्यक्ष और उनके पति उत्तियो कुंडू उपाध्यक्ष हैं। शांतनु डे पार्टी के संगठन महासचिव हैं। नियमों के मुताबिक, अगर किसी भी पार्टी के विधायक या संसदीय दल के दो तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं तो उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

 

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NCPI में नहीं बनी है सहमति?

इंडिया टुडे से बातचीत में शांतनु डे ने कहा है, 'सुबह से मुझे भी खबर आ रही है कि लोग जुड़ रहे हैं लेकिन मेरी सोच यही है कि ये लोग गलत करके आए हैं। जनता ने इन लोगों का बहिष्कार किया है। ऐसे में पार्टी के संगठन महासचिव के तौर पर कहूंगा कि इन लोगों को दल में लेना सही नहीं रहेगा।'

 

इन्हीं शांतनु डे से 'द वायर' ने भी बात की। शांतनु डे ने कहा, 'अगर पार्टी बीजेपी के साथ मर्ज करना चाहती तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थक हूं और हमने पूर्व में बीजेपी का साथ भी दिया है लेकिन इन टीएमसी नेताओं का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। भ्रष्टचारा का कोई भी केस हो, जैसे कि शारदा, नारदा आदि, सब में इनका नाम आया।'

 

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शांतनु डे ने कहा है कि वह या पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे दागियों को पार्टी में शामिल करने का समर्थन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस पार्टी के सदस्यों की संख्या लगभग एक हजार है। उनका यह भी कहना है कि त्रिपुरा चुनाव में उन्होंने पार्टी की अगुवाई की लेकिन उनसे पूछे बिना ही यह फैसला किया और यह गलत है। शांतनु का कहना है कि वह इसका समर्थन नहीं कर सकते हैं। रोचक बात है कि 2023 में त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में उतरी NCPI का नारा था कि 'अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं का विरोध करो।'