पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है। यहां से राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हरा दिया था, इसलिए इस सीट से इस्तीफा दे दिया। अब यहां उपचुनाव हो रहे हैं और कांग्रेस ने मिलन प्रधान पर भरोसा जताया है।
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी ठीक तब हुई, जब ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके फैसले के बाद ममता बनर्जी ने मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।
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11 सितंबर को उम्मीदवार बने, 18 को गिरफ्तार
11 सितंबर को कांग्रेस ने मिलन प्रधान को नंदीग्राम सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव प्रचार इससे पहले जोर पकड़े, वह गिरफ्तार हो गए हैं।
कौन हैं मिलन प्रधान?
मिलन प्रधान नंदीग्राम के सोनाचूड़ा इलाके से आते हैं। वह पुराने कांग्रेस नेता हैं। साल 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से वह जुड़े रहे हैं। लेफ्ट सरकार के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोला था। वह उस दौर में बने भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (BUPC) से भी जुड़े रहे हैं। यह समिति औद्योगीकरण के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बने आंदोलन का एक छत्र संगठन था।
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कैसे राजनीति में आगे बढ़े मिलन प्रधान?
मिलन प्रधान, साल 2007 में BUPC के संयोजक थे। उस दौर में सीपीआई(M) के कार्यकर्ताओं ने उनके सोनाचूड़ा स्थित घर पर धावा बोलकर सामान लूट लिया था। घर के एक हिस्से में आग भी लगा दी थी। उनके माता-पिता उस समय घर में मौजूद थे। मिलन प्रधान पिछले दरवाजे से भागकर नंदीग्राम हाई स्कूल के राहत शिविर में पहुंचे थे।
क्यों विवादों में रहे हैं मिलन प्रधान?
मिलन प्रधान के बारे में कहा जाता है कि वह BUPC नेता साबुज प्रधान के रिश्तेदार हैं। हत्या के एक मामले में 2011 में उनके खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। उस समय भी उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित था। नंदीग्राम संघर्ष से जुड़े दो हत्या के मामलों में भी उनका नाम शामिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और BJP से जुड़े कुल 63 लोगों के साथ वह भी आरोपी हैं। यह मामला बाद में दब गया था।
क्यों दोबारा खुला मामला?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 5 मार्च 2021 को इन मामलों को वापस लेने पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद हल्दिया की एक अदालत ने पुलिस को इन्हें फिर से खोलने और जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। मिलन प्रधान भी उन आरोपियों में शामिल थे, जो मामले फिर से खुलने के बाद छिप गए थे।
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अब क्यों गिरफ्तार हुए हैं?
शुक्रवार को हुई गिरफ्तारी किस मामले और किन धाराओं से जुड़ी है, इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। सीधे तौर पर उन पुराने मामलों से इसे जोड़ा नहीं जा सकता। कांग्रेस प्रवक्ता मिता चक्रवर्ती ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने जैसे ही समर्थन किया, मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया। मिता चक्रवर्ती का कहना है कि सरकार विपक्ष को राजनीतिक स्थान नहीं दे रही है, डरा धमका रही है। उन्होंने कहा कि दश को लोकतंत्र चाहिए, तानाशाही नहीं।
पुलिस क्या कह रही है?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिलन प्रधान 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक हत्या के मामले में आरोपी हैं, जिसमें उनके खिलाफ वारंट लंबित था। अब उन्हें शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
