कांग्रेस वर्किंग समिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पद से इस्तीफा दें और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए। उन्होंने कहा है कि लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर किया जा रहा है, चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर काम होना चाहिए। मल्लिकार्जुन खड़गे ने संवैधानिक संस्थाओं पर भारतीय जनता पार्टी के कब्जे का भी आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की है कि प्रधानमंत्री इस्तीफा दें, तभी निष्पक्ष चुनाव हो सकेंगे। कांग्रेस वर्किंग समिति की बैठक में ज्यादातर नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग, सरकार के दबाव में काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत हटाने की मांग की है। उन्होंने मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC की बैठक में यह बात कही। मल्लिकार्जुन खड़गे ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) में गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा मांगा। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री ने चुनाव आयोग प्रमुख पर दबाव डाला।
मल्लिकार्जुन खड़गे, अध्यक्ष, कांग्रेस:-
नौकरी तो दी नहीं, अब वोट का अधिकार भी नहीं देना चाहते हैं। नौजवान सवाल पूछेगा, उखाड़ फेंकेगा, इसका डर मन में बैठ गया है। लेकिन ये हक कोई खैरात में नहीं मिला है, लाखों लोगों ने इसके लिए कुर्बानियां दी हैं। मोदी-शाह जैसे लोग चाहे जितने भी षड्यंत्र कर लें, कांग्रेस उन्हें सफल नहीं होने देगी। ये लोकतंत्र, ये वोट का हक, ये हमारी विरासत है, जो खून-पसीने से सींची है। कोई तानाशाह उसे बर्बाद कर दे, ये हम होने नहीं देंगे।
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CWC ने क्या प्रस्ताव पास किया है?
CWC ने इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव भी पास किया है। इसमें CEC के इस्तीफे, SIR को तुरंत रोकने और हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नामों को फिर से जोड़ने की मांग की गई है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि पार्टी अब यह अभियान सड़क से संसद तक तेज करेगी।
मल्लिकार्जुन खड़गे की 5 मांगें क्या हैं?
- मतदाता सूची में हुए हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए
- राजनीतिक दलों को सूची और जरूरी डेटा आसान फॉर्मेट में समय पर मिले
- गंभीर गड़बड़ी के सबूत मिलने पर स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो
- जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, उन्हें पूरी जानकारी दी जाए और अपील का मौका मिले
- चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अहम डेटा और फैसलों में पारदर्शिता हो
'चुनाव आएंगे-जाएंगे, लोकतंत्र का बचना जरूरी है'
समिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'यह मुद्दा सिर्फ चुनाव जीतने या हारने का नहीं है। यह लोकतंत्र और संविधान को बचाने का सवाल है। चुनाव आते-जाते रहते हैं और सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान बने रहते हैं।'
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सरकार को चुनाव प्रक्रिया पर घेर रही कांग्रेस
मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने नोटबंदी की तुलना 'वोटबंदी' से की। उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित और वंचित वर्गों पर पड़ेगा।
उन्होंने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में बदलाव का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये बदलाव युवाओं को मताधिकार से दूर करने के लिए किए गए और पूरी तरह अवैध हैं। उन्होंने 1988 में राजीव गांधी सरकार के मतदान की उम्र 21 से 18 साल करने के फैसले का जिक्र भी किया।
ज्ञानेश कुमार विवाद पर कांग्रेस ने क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि दोनों आयुक्तों ने CEC ज्ञानेश कुमार के कदमों को मनमाना और अनुचित कहा है। यह बैठक इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के कुछ दिन बाद हुई, जिसमें SIR को लेकर आयोग के भीतर मतभेद की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि SIR से जुड़े फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी हुए।
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चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने मतभेद की खबरों को खारिज किया है। आयोग के मुताबिक अलग-अलग राय और टिप्पणियां विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग का कहना है कि उसके आदेशों को पूरी कानूनी मंजूरी है और वे तय वैधानिक प्रक्रिया से जारी हुए हैं। उसने यह भी कहा कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
अब क्या करेगी कांग्रेस?
CWC के प्रस्ताव में कांग्रेस ने कहा है कि SIR से अब तक 13 करोड़ 30 लाख नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं। पार्टी का कहना है कि यह प्रक्रिया नागरिकों पर पात्रता साबित करने का बोझ डालती है। प्रस्ताव में इसे अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 के खिलाफ बताया गया है। कांग्रेस ने कहा है कि वह इस मुद्दे को संसद, अदालतों और सड़कों पर उठाएगी।
