पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पश्चिम बंगाल में कई नए विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। दो ऐसे बिल पेश होने वाले हैं, जिनके बाद असमाजिक गतिविधियों की परिभाषा बदल जाएगी बिना मुकदमे के 12 महीने तक किसी को हिरासत में रखा जा सकता है, अपराधी की संपत्ति जब्त कर नीलामी के जरिए नुकसान की भरपाई का अधिकार भी मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस इन विधेयकों को काला अध्याय बता रही है।
ये विधेयक उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के समान कानूनों पर आधारित हैं। नए कानून के तहत एंटी-सोशल एक्टिविटी में वे सभी काम शामिल किए गए हैं जो लोगों में डर, असुरक्षा या अशांति फैलाते हैं, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ते हैं, संपत्ति पर कब्जा करते हैं। सार्वजनिक-निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। खनन, बालू निकासी, वन उत्पाद और वन्यजीव संबंधी अवैध गतिविधियां भी इसमें शामिल हैं।
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कौन से कानून आने वाले हैं?
सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का बिल भी 29 जून को विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार पश्चिम बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज बिल 2026 और पश्चिम बंगाल मेंटिनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर बिल 2026 जैसे कानून लाने की तैयारी में है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड कैसा होगा?
BJP ने 2026 के विधानसभा चुनाव के घोषणा-पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के छह महीने के अंदर UCC लागू किया जाएगा। राज्य सरकार 29 जून को इसे विधानसभा में पेश करेगी। UCC के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधी सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लाने का प्रयास है। BJP शासित अन्य राज्यों की तरह पश्चिम बंगाल में भी आदिवासी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखने की संभावना है।
लव जिहाद पर क्या कानून बनाने की है तैयारी?
शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार लव जिहाद, लैंड जिहाद और जबरन धर्मांतरण के खिलाफ भी सख्त कानून लाएगी। लव जिहाद के आरोप मुस्लिम युवाओं पर दक्षिणपंथी संगठन लगाते रहे हैं। आरोप है कि वे अपने प्यार के जाल में फंसाकर हिंदू लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराते हैं। न तो केंद्र सरकार और न ही अदालतें इसे आधिकारिक रूप से मानती हैं।
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तृणमूल कांग्रेस क्या कह रही है?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने इन प्रस्तावित कानूनों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ये कानून विपक्ष को दबाने और लोगों को डराने के लिए हैं। महुआ मोइत्रा ने एंटी-सोशल एक्टिविटी बिल को इमरजेंसी काल के MISA, UAPA से भी ज्यादा कठोर बताया।
TMC के वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने UCC का विरोध करते हुए कहा कि यह धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने वादा किया था कि UCC तभी लाया जाएगा जब मुस्लिम समुदाय इसे स्वीकार कर ले।
UCC पर क्या होना चाहिए?
UCC भारत में आजादी से पहले से ही विवाद का विषय रहा है। संविधान सभा में इस पर विस्तृत चर्चा हुई थी और इसे निर्देशक सिद्धांतों में रखा गया, जो कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं। अब BJP शासित राज्यों में इसे लागू करने की कोशिश चल रही है।


