उत्तर प्रदेश के जिला प्रतापगढ़ के कुंडा विधायक और जनसत्ता दल के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर अपना रुख साफ किया है। राजा भैया ने कहा कि बिना किसी गठबंधन के भी उनकी पार्टी का वजूद कांग्रेस और बीएसपी से बड़ा है। उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी दल या नेता से गठबंधन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। हालांकि, जनसत्ता दल के विचारों से सहमत होकर कोई दल साथ आना चाहता है तो उसके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।

 

राजा भैया ने कहा कि अभी तक उनकी पार्टी की किसी भी राजनीतिक दल या नेता के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल की तरह जनसत्ता दल भी आगामी विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करना चाहता है। पार्टी इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

विचारों से किसी कीमत पर समझौता नहीं

गठबंधन के सवाल पर राजा भैया ने पार्टी के विचारों को लेकर भी स्पष्ट रुख रखा। उन्होंने कहा कि जनसत्ता दल के कुछ विचार हैं और इन विचारों से किसी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी ने पहले भी अपने विचारों से समझौता नहीं किया और आगे भी ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल जनसत्ता दल के विचारों के साथ आता है और गठबंधन करना चाहता है तो उसके लिए दरवाजे खुले हैं। पार्टी ने गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है, लेकिन अपने विचारों को लेकर समझौता करने की बात भी साफ तौर पर खारिज की है।

 

यह भी पढ़ें: BSP का संगठन बदलाव, ईशान आनंद और राजाराम पर जोर क्यों है?

दो विधायक और एक एमएलसी

जनसत्ता दल का गठन 30 नवंबर 2018 को हुआ था। मौजूदा समय में पार्टी के विधानमंडल में तीन सदस्य हैं। इनमें कुंडा से खुद राजा भैया और प्रतापगढ़ की बाबागंज सीट से विनोद सरोज विधायक हैं, जबकि अक्षय प्रताप सिंह पार्टी के एमएलसी हैं। यानी जनसत्ता दल के पास दो विधायक और एक विधान परिषद सदस्य हैं। राजा भैया ने इसी मौजूदा राजनीतिक मौजूदगी का हवाला देते हुए कहा कि बिना किसी गठबंधन के भी विधानमंडल में उनकी पार्टी के तीन सदस्य हैं और यह संख्या कांग्रेस और बीएसपी से अधिक है। यह तुलना राजा भैया ने खुद अपने बयान में की है।

2027 में ज्यादा सीटों पर जीत का लक्ष्य

राजा भैया ने कहा कि जनसत्ता दल भी दूसरी राजनीतिक पार्टियों की तरह ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करना चाहता है। फिलहाल पार्टी की किसी दल के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत नहीं हुई है और न ही किसी संभावित गठबंधन का नाम सामने आया है। ऐसे में पार्टी एक तरफ अपने दम पर चुनाव में अधिक सीटें हासिल करने की तैयारी की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ समान विचारों वाले दल के साथ गठबंधन की संभावना भी खुली रखी गई है।

 

यह भी पढ़ें: BSP के कैडर मॉडल को अपना रही सपा, जाति चौपाल पर फोकस, उम्मीदें क्या हैं?

गठबंधन का रास्ता खुला, शर्त विचारों की

राजा भैया के बयान में गठबंधन को लेकर दो बातें साफ तौर पर सामने आई हैं। पहली, अभी किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन पर बातचीत नहीं हुई है। दूसरी, अगर कोई दल जनसत्ता दल के विचारों के साथ आता है तो उसके लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं। राजा भैया ने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपने विचारों से समझौता नहीं करेगी।