उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस अब संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी में जुट गई है। दिल्ली में हुई अहम बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस में नई कार्यकारिणी को लेकर हलचल तेज हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को नई टीम मिलने की चर्चा ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अजय राय को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है लेकिन संगठन में उनके नेतृत्व में नई टीम तैयार किए जाने के संकेत जरूर मिल रहे हैं।
दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ यूपी के प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, सांसद-विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और जिलों के प्रभारियों के साथ संगठन को चुनाव के लिए तैयार करने पर चर्चा हुई। हर विधानसभा सीट पर प्रभावी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया।
3 साल से अटकी टीम, नई कार्यकारिणी की तैयारी
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर है। अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से नई टीम को लेकर लंबे समय से मंथन चलता रहा है। अब छह नए सह-प्रभारियों की नियुक्ति के बाद नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की संभावना मजबूत हुई है। पार्टी सूत्रों और राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को खास महत्व दिया जाएगा।
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हाल में कांग्रेस ने यूपी के संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए छह नए राष्ट्रीय सचिवों को सह-प्रभारी बनाया है। अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, जगदीश चंदर जांगिड़, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल हन्नान को यूपी की जिम्मेदारी दी गई है। ये सभी यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ काम करेंगे।
‘टीम प्रियंका’ की जगह नई टीम
कांग्रेस ने लंबे समय से यूपी में जिम्मेदारी संभाल रहे छह सह-प्रभारियों को हटाकर नया चेहरा आगे किया है। धीरज गुर्जर, नीलांशु चतुर्वेदी, प्रदीप नरवाल, राजेश तिवारी, सत्यनारायण पटेल और तौकीर आलम की जगह नई टीम लाई गई है। ये नेता 2019 से यूपी संगठन में सक्रिय थे और प्रियंका गांधी के यूपी प्रभारी रहने के दौरान उनकी टीम का हिस्सा माने जाते थे। नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषण में इसे कांग्रेस के मिशन-2027 के लिए संगठन को नए सिरे से तैयार करने की कवायद माना जा रहा है।
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नई कार्यकारिणी में किस तरह के चेहरों पर दांव?
नई कार्यकारिणी के नामों का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है, इसलिए किसी व्यक्ति का नाम तय मानना जल्दबाजी होगी। लेकिन पार्टी की मौजूदा संगठनात्मक रणनीति को देखते हुए पश्चिमी यूपी, पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड से प्रभावी नेताओं को प्रतिनिधित्व देने के साथ दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है।
कांग्रेस की नई सह-प्रभारी टीम में भी अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के नेताओं को जगह दी गई है। इससे संकेत मिल रहा है कि नई कार्यकारिणी में भी जातीय समीकरण के साथ जमीन पर सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता मिल सकती है।
मिशन-2027: पहले संगठन, फिर चुनावी मैदान
कांग्रेस के लिए 2027 का चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन से पार्टी को यूपी में पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया था। अब कांग्रेस उस प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और हर विधानसभा क्षेत्र में मजबूत चेहरे तैयार करने की है। अजय राय ने जून में कहा था कि कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है। हालांकि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन होगा या नहीं और सीटों का बंटवारा किस तरह होगा, इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को करना है।
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राहुल गांधी की नई टीम से क्या बदलेगा?
नई सह-प्रभारी टीम के गठन को कांग्रेस की यूपी रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। पार्टी ने लंबे समय से काम कर रही पुरानी टीम को हटाकर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी है। अब यही टीम अलग-अलग जोन में संगठन को सक्रिय करने और नई कार्यकारिणी के गठन में भूमिका निभा सकती है। यूपी में कांग्रेस के लिए अब अगला बड़ा पड़ाव नई प्रदेश कार्यकारिणी है।
अजय राय को नई टीम मिलती है या नेतृत्व में कोई बदलाव होता है, इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा। लेकिन दिल्ली बैठक, छह नए सह-प्रभारियों की नियुक्ति और जातीय-क्षेत्रीय संतुलन पर जोर से इतना साफ है कि कांग्रेस ने 2027 के लिए संगठन को अब चुनावी मोड में डालना शुरू कर दिया है।
