हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का बेहद खास महत्व है। आज इस पर्व का सातवां दिन है, जब सभी भक्त मां कालरात्रि की आराधना करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त मां कालरात्रि की आराधना करता है, उसके जीवन से भय और अंधकार दूर होते हैं। साथ ही, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलने की भी मान्यता है। देवी मां का यह स्वरूप बेहद शक्तिशाली और उग्र माना जाता है।

 

धार्मिक मान्यता के मुताबिक, मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बनी चीजें बेहद पसंद हैं। इस वजह से भक्तों को आज के दिन खास तौर पर गुड़ की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। मां कालरात्रि के इस स्वरूप में देवी दुर्गा के चार हाथ होते हैं और उनके बाल खुले रहते हैं। इसके साथ ही, देवी मां के गले में एक चमकदार माला दिखाई देती है। मां का यह स्वरूप अन्य स्वरूपों से बेहद अलग है। अब सवाल उठता है कि देवी मां की पूजा कैसे करनी चाहिए और किन मंत्रों का जाप करना चाहिए। आइए जानते हैं।

 

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कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा?

इस दिन भक्तों को ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। इसके बाद स्नान करके घर के पूजा स्थान की सफाई करें। माता की चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और मां कालरात्रि की सुंदर तस्वीर स्थापित करें। अब पूजा स्थान पर गुड़ की मिठाई, फूल, फल, लौंग और इलायची अर्पित करें। साथ ही, घी का दीपक जलाएं।

 

भक्तों को पूजा के बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। इसके बाद मां कालरात्रि के विशेष मंत्रों का जाप करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से मां की आराधना करने से भक्तों को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

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मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 बजे से सुबह 5:47 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
संध्या मुहूर्त: दोपहर 3:54 बजे से शाम 6:14 बजे तक

मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्तों को सुबह पूजा और शाम की आरती के बाद मां कालरात्रि के मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप करने से भक्तों को देवी मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

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मां कालरात्रि के मंत्र
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

 

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।