मुस्लिम धर्म में मक्का की यात्रा करना बेहद शुभ माना जाता है। लाखों लोग हर साल हज और उमरा की यात्रा करते हैं। ये दोनों ही यात्राएं मक्का की जाती हैं लेकिन दोनों यात्राओं के अर्थ और महत्व अलग हैं। जहां एक तरफ उमरा में लाखों लोग काबा के चारों तरफ चक्कर लगाते हैं, इसके बजाय दूसरी तरफ हज यात्रा के दौरान लोग अपना फर्ज निभाते हैं। उमरा की यात्रा हज यात्रा की तुलना में छोटी होती है। इसके साथ ही मुस्लिम धर्म में हज को ज्यादा अहम और महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुस्लिम धार्मिक जानकारों के मुताबिक, हज की यात्रा में कुछ खास किस्म की परंपराएं निभाई जाती हैं, जो इस यात्रा का महत्व बढ़ाती हैं। मुस्लिम धर्म की मान्यता के अनुसार, जो भी व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम है, उसे जीवन में एक बार जरूर हज की यात्रा करनी चाहिए। इसी वजह से आज के दौर में बड़ी तादाद में लोग हज की यात्रा करते हैं, जिस कारण हज की यात्रा ज्यादा खर्चीली होती है।
यह भी पढ़ें: कार्तिक जितना ही पवित्र है कुआर महीना, इस दौरान किसकी आराधना करनी चाहिए?
हज यात्रा का ज्यादा महत्व क्यों?
हज और उमरा, दोनों यात्राओं में लोग सऊदी अरब के सबसे पुराने शहर मक्का जाते हैं। इसके बावजूद हज यात्रा को खास महत्व दिया गया है। इस्लाम में हज को पांच स्तंभों में से एक माना जाता है। पांच स्तंभ का अर्थ है कि व्यक्ति के पांच फर्ज हैं, जिसमें व्यक्ति को कलमा पढ़ना, रोजा रखना, दान देना, शाहादत यानी सिर्फ अल्लाह को सर्वप्रथम मानना और आखिरी स्तंभ हज की यात्रा करना शामिल है। इस वजह से हज की यात्रा को खास माना जाता है। इसका मतलब साफ है कि हज की यात्रा अनिवार्य है, जबकि उमरा की यात्रा अनिवार्य नहीं है।
इस्लाम के सबसे पाक ग्रंथों में से एक कुरान की आयत में कहा गया है कि उमरा अल्लाह की इबादत के लिए महत्वपूर्ण यात्रा है, जबकि हज की यात्रा के जरिए व्यक्ति की आत्मा शुद्ध होती है।
दोनों यात्राओं की अलग परंपरा
उमरा और हज की यात्रा अलग-अलग समय की जाती है। जहां एक तरफ उमरा की यात्रा पूरे साल की जा सकती है, सिर्फ हज यात्रा के दौरान यह यात्रा नहीं की जाती, वहीं दूसरी तरफ हज की यात्रा इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में की जाती है।
यह भी पढ़ें: जैन धर्म के नवकार मंत्र में छिपा है सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति बनने का राज, जानें रहस्य
साथ ही, उमरा में सिर्फ काबा के इर्द-गिर्द घूमकर अल्लाह की इबादत की परंपरा है। इसके बजाय व्यक्ति हज यात्रा में कई रस्में निभाता है, जिसमें व्यक्ति का मिना में ठहरना, अराफात के मैदान में रात बिताना और शैतान को कंकड़ मारने जैसी परंपराएं शामिल हैं। हज सिर्फ धार्मिक नजरिए से ही नहीं, बल्कि रस्मों की संख्या में भी उमरा से कहीं ज्यादा बड़ा है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
