सनातन धर्म में पितृ पक्ष को बेहद खास माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति सात्विक जीवन जीता है। साथ ही अपने पूर्वजों की याद में पूरी तरह से समर्पित होकर श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण जैसी परंपराएं निभाता है। धार्मिक जानकारों के अनुसार व्यक्ति को तिथि के हिसाब से पूर्वजों के लिए श्राद्ध करना चाहिए। माना जाता है कि जिस तिथि को पूर्वजों की मृत्यु हुई थी, उस दिन श्राद्ध और दान-पुण्य किया जाए तो पितरों को मोक्ष और शांति मिलती है।

 

पितृ पक्ष 16 दिनों का होता है, लेकिन इस बार 16 दिन के बजाय 15 दिनों तक ही पितृ पक्ष रहेगा। हिन्दी पंचांग के अनुसार इस बार दो तिथियां एक ही दिन पड़ेंगी। धार्मिक जानकारों के मुताबिक इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि 30 सितंबर को ही पड़ेगी। इस वजह से 30 सितंबर की तारीख पितृ पक्ष में बेहद खास है। जिन लोगों के पितरों की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई थी, वे लोग 30 सितंबर के दिन श्राद्ध कर सकते हैं।

 

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पितृ पक्ष की तिथियां

27 सितंबर 2026-  प्रतिपदा श्राद्ध
 28 सितंबर 2026- द्वितीया श्राद्ध:  
29 सितंबर 2026- तृतीया और महाभरणी श्राद्ध
30 सितंबर 2026- चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 - षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026- सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026-  अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026- नवमी (मातृ नवमी) श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026-  दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026- एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026- द्वादशी व मघा श्राद्धर
8 अक्टूबर 2026- त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026- चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026- सर्वपितृ अमावस्या

 

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पितृ पक्ष में तिथि का महत्व

सनातन धर्म में हर श्राद्ध की परंपरा हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार की जाती है। तिथि चंद्रमा की चाल पर आधारित होती है। शास्त्रों के अनुसार, जब वही तिथि आती है, जिस तिथि को पूर्वजों का निधन हुआ था, तब पूर्वजों को तर्पण और श्राद्ध करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से तर्पण का प्रभाव सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार व्यक्ति को पूर्वजों का तर्पण कुतुप मुहूर्त में करना चाहिए। इस मुहूर्त पर यमराज का खास प्रभाव रहता है। कई लोग ऐसे हैं, जिनको पूर्वजों की मृत्यु की तिथि पता नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों को पितरों की मृत्यु की तिथि नहीं पता है, तो कब श्राद्ध किया जाए। आइए जानते हैं।

 

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धार्मिक जानकारों के अनुसार, अगर व्यक्ति को अपने माता-पिता या किसी पूर्वज की मृत्यु की तिथि पता नहीं है, तो वे लोग सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं।

 

नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।