भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने इतिहास रच दिया है। 33 साल के मनप्रीत सबसे ज्यादा इंटरनेशनल हॉकी मैच खेलने वाले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। मनप्रीत ने बुधवार (17 जून) को जर्मनी के खिलाफ FIH हॉकी प्रो लीग मैच के दौरान यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने पूर्व दिग्गज दिलीप टिर्की का रिकॉर्ड तोड़ा। दिलीप टिर्की ने अपने करियर में 412 इंटरनेशनल मैच खेले थे। मनप्रीत के नाम 413 इंटरनेशनल मैच हो गए हैं।

 

भारत को अपनी कप्तानी में टोक्यो ओलंपिक 2020 में ब्रॉन्ज दिलाने वाले मनप्रीत पंजाब के जालंधर जिले से आते हैं। उन्होंने 2018 में अर्जुन अवॉर्ड और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

 

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दुनिया में किस नंबर पर हैं मनप्रीत?

सबसे ज्यादा इंटरनेशनल हॉकी मैच खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बेल्जियम के जॉन-जॉन डोहमन के नाम है। उन्होंने कुल 481 इंटरनेशनल मैच खेले। उनके बाद नीदरलैंड्स के ट्यून डी नूइजर (453 मैच), ऑस्ट्रेलिया के एडी ओकेंडेन (451 मैच) और ब्रिटेन के बैरी मिडलटन (432 मैच) का नाम है। मनप्रीत चौथे पायदान पर हैं। खास बात है कि 400 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाले वह इकलौते ऐक्टिव प्लेयर हैं।

सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाले हॉकी खिलाड़ी

  • जॉन-जॉन डोहमेन (बेल्जियम) - 481 मैच
  • ट्यून डी नूइजर (नीदरलैंड्स) - 453 मैच
  • एडी ओकेंडेन (ऑस्ट्रेलिया) - 451 मैच
  • बैरी मिडलटन (ब्रिटेन) - 432 मैच
  • मनप्रीत सिंह (भारत) - 413 मैच
  • दिलीप टिर्की (भारत) - 412 मैच
  • वसीम अहमद (पाकिस्तान) - 410 मैच
  • जेरोएन डेल्मी (नीदरलैंड्स) - 401 मैच

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भारत की जीत ने मनप्रीत की उपलब्धि को और खास बनाया

मनप्रीत के 413वें इंटरनेशनल मैच में भारत ने जर्मनी को 3-1 से शिकस्त दी। भारत की ओर से मनदीप सिंह (सातवें), शिलानंद लाकड़ा (13वें) और नीलकांटा शर्मा (35वें) ने एक-एक गोल दागा, जबकि जर्मनी की तरफ से एकमात्र गोल राफेल हार्टकॉफ (45वें) ने किया। भारतीय मिडफील्डर हार्दिक सिंह को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

 

भारत ने मुकाबले में अच्छी शुरुआत की और शुरू से ही गेंद पर कंट्रोल बनाए रखा, जिसका फायदा उसे सातवें मिनट में मिला, जब मनदीप ने गोल कर टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। लाकड़ा ने पहला क्वार्टर खत्म होने से पहले ही शानदार शॉट लगाकर जर्मन गोलकीपर अलेक्जेंडर स्टैडलर को हैरान किया और भारत को 2-0 से आगे कर दिया। दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने भारत के हाफ में घुसने की कोशिश की लेकिन भारतीय डिफेंस ने दमदार खेल का नजारा पेश किया।

 

जर्मनी को दो पेनल्टी कॉर्नर मिले लेकिन पहला अमित रोहिदास ने बचाया और दूसरा गोलकीपर मोहित ने नाकाम कर दिया, जिससे भारत की बढ़त बरकरार रही। भारत ने तब अपनी बढ़त को 3-0 तक कर दिया ,जब नीलकांटा ने अकेले ही दौड़ते हुए जर्मन डिफेंडरों को पछाड़कर गेंद को गोल में डाल दिया। तीसरे क्वार्टर में महज 20 सेकंड बाकी रहते हुए हार्टकोफ ने 45वें मिनट में अपनी टीम के लिए पहला गोल दागा। जर्मनी की टीम ने इसके बाद आक्रामक रवैया अपनाया और चौथे क्वार्टर में लगातार हमले किए लेकिन भारतीय डिफेंस ने उन्हें नाकाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।