पंजाब में आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले नशा खत्म करने का वादा किया था। पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने 2022 विधानसभा चुनाव से पहले वादा किया था कि पार्टी की सरकार बनने के तीन महीने के भीतर ही राज्य में नशा खत्म कर दिया जाएगा। इन्हीं वादों के दम पर आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज की। मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में पार्टी ने सरकार का गठन किया और अब 6 महीने बाद फिर से राज्य में चुनाव हैं। ऐसे में अब पार्टी को अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच पेश करना है लेकिन नशे के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विपक्ष अब अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान पर तंज कस रहा है कि नशा खत्म क्यों नहीं हुआ। 

 

पंजाब में पिछले साढे चार साल में आम आदमी पार्टी की सरकार ने नशे की समस्या को हल करने के लिए सरकार ने कई अभियान चलाए और कोशिशें की। पंजाब में पाकिस्तान से ड्रग्स ड्रोन के जरिए भेजा जाता है। ऐसे में सरकार ने सबसे पहले ड्रोन पकड़ने पर ही जोर दिया। 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद ड्रोन जब्त करने में पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई और साल दर साल यह संख्या बढ़ती ही गई। 

 

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सीमा पार से नशे पर नकेल

पाकिस्तान से लगती 553 किमी लंबी सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए, ताकि ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी रुके। सीमा पर 5,000 होम गार्ड तैनात करने और उन्हें BSF के साथ समन्वय में काम करने की योजना बताई गई। हालांकि, इसको लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद भी रहा कि सीमा सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और राज्य के नेता केंद्र और भारतीय जनता पार्टी पर इसके लिए आरोप भी लगाते रहे। पंजाब के मुख्यमंत्री का दावा है कि इन कदमों के बाद पाकिस्तान से आने वाले नशे में लगभग 80 प्रतिशत कमी आई है।

युद्ध नशेआं विरुद्ध

1 मार्च 2025 को पंजाब सरकार ने युद्ध नशेआं विरुद्ध यानी नशे के खिलाफ युद्ध अभियान की शुरुआत की। इसके बाद नशा तस्करों के खिलाफ बड़े स्तर पर एफआईआर दर्ज की गईं और गिरफ्तारियां भी शुरू हुईं। अगस्त 2025 में सीमा पर ड्रोन के जरिए होने वाली नशे की तस्करी रोकने के लिए तीन एंटी ड्रोन सिस्टम लगाए गए। इन्हें अमृतसर, तरनतारन और फिरोजपुर में तैनात किया गया। सरकार ने कुल 9 एंटी ड्रोन सिस्टम लगाने की योजना बताई थी।

 

साल 2025 में नशे की दवाओं की खरीद करीब 11 करोड़ टैबलेट तक पहुंच गई। इसी दौरान ओओएटी यानी आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट में नए रजिस्ट्रेशन बढ़कर 17,702 हो गए। 1 मार्च 2025 से 3 सितंबर 2026 तक सेफ पंजाब हेल्पलाइन 97791 00200 पर लोगों ने 51,979 गुप्त सूचनाएं दीं। इन सूचनाओं के आधार पर 25,339 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

दूसरा चरण

जनवरी 2026 में युद्ध नशे विरुद्ध अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की गई। इस चरण में नशे के खिलाफ लड़ाई में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके तहत पिंडां दे पहरेदार (गांव के पहरेदार) जैसी मुहिम और वॉलंटियर नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश की गई। 1 मार्च 2025 से 10 सितंबर 2026 तक पंजाब में नशा तस्करी के खिलाफ 60,582 एफआईआर दर्ज की गईं और 79,784 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 354 बड़े कमर्शियल मामले शामिल हैं, जिनमें हर मामले में 2 किलो से ज्यादा हेरोइन बरामद हुई। 2026 में अगस्त तक सरकारी नशा मुक्ति और रिहैब सेंटरों में दाखिले 164 प्रतिशत बढ़े। वहीं, OOAT में अगस्त 2026 तक 12,500 से ज्यादा नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इससे नशा छोड़ने के इलाज की मांग और लोगों की इलाज तक पहुंच बढ़ने का संकेत मिलता है।

क्या सफल हुई सरकार?

सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद पंजाब में नशा खत्म नहीं हो रहा है बल्कि युवा नशे की चपेट में आता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सख्त कार्रवाई और सीमा पर एंटी-ड्रोन निगरानी बढ़ने से सड़क पर मिलने वाली हेरोइन की सप्लाई कम हुई है। हालांकि, अब तस्कर फार्मास्यूटिकल ड्रग्स यानी नशीली गोलियों और कैप्सूल का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं। गुजरात, यूपी, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों से इनकी सप्लाई बढ़ी है। 2025 से अब तक ऐसी 11.54 लाख गोलियां जब्त की जा चुकी हैं। इसके साथ ही विपक्ष आरोप लगा रहा है कि पंजाब में नशे की होम डिलीवरी हो रही है। ऐसे में सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। आगामी चुनाव में एक बार फिर नशा सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक है और जनता इससे परेशान है।