पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार को अगले साल की शुरुआत में चुनावों का सामना करना पडे़गा। दिल्ली के बाद अब पार्टी के पास एकमात्र उम्मीद पंजाब ही है। ऐसे में पार्टी पंजाब में पूरा जोर लगा रही है। पार्टी दिल्ली के मॉडल पर पंजाब में फिर से सरकार बनाना चाहती है। दिल्ली मॉडल का एक अहम हिस्सा स्कूली शिक्षा थी और AAP अब पंजाब में स्कूली शिक्षा को लेकर फ्रंट फुट पर खेल रही है। पार्टी को हाल ही में आई राष्ट्रीय शिक्षा रैंकिंग में पंजाब पूरे देश में पहले नंबर पर रहा। इसको लेकर पंजाब सरकार अब सभी स्कूलों में जश्न मना रही है। 

 

पंजाब सरकार अब पंजाब में शिक्षा क्रांति की बात कर रही है। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, 'दशकों तक यह माना जाता रहा कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है, लेकिन पंजाब ने इस धारणा को गलत साबित कर दिखाया है। यह रैंक हमारे कक्षाओं से उत्पन्न हुई शिक्षा क्रांति का प्रमाण है।'स्कूलों की रैंकिंग, सरकारी स्कूलों में बदलाव, मेगा पीटीएम और शिक्षा मॉडल को लेकर सरकार का अभियान तेज होता दिखाई दे रहा है।

 

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शिक्षा क्रांति की बात कर रही सरकार

पंजाब सरकार अब पंजाब में शिक्षा क्रांति की बात कर रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट में पहला रैंक मिलने के बाद से सरकार इसे बड़े स्तर पर प्रचारित कर रही है। इसके लिए राज्यभर के 19 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूलों में एक साथ मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग आयोजित की गई। सरकार ने इसे सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि शिक्षा सुधार के सार्वजनिक प्रदर्शन के रूप में पेश किया।

दिल्ली मॉडल पर काम शुरू

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने अपने पहले कार्यकाल से ही शिक्षा को अपनी राजनीति के केंद्र में रखा था। सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लासरूम, शिक्षक प्रशिक्षण और स्कूल परिणामों को लगातार चुनावी और प्रशासनिक उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया। बाद के चुनावों में पार्टी ने इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया और सत्ता में वापसी की रणनीति का अहम हिस्सा बनाया। अरविंद केजरीवाल की पूरे देश में उनके शिक्षा क्षेत्र में किए गए काम के लिए तारीफ हुई थी। अब पंजाब में भी कुछ वैसा ही पैटर्न दिखाई देने लगा है।

 

पंजाब सरकार लगातार स्कूलों में बदलाव, शिक्षक प्रशिक्षण, बजट वृद्धि और सीखने के परिणामों को सामने रख रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और शिक्षा विभाग की ओर से जारी बयानों में शिक्षा सुधार को सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल किया जा रहा है। स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जैसी पहल भी की जा रही है। 

विपक्ष क्या बोला?

भले ही आम आदमी पार्टी की सरकार पंजाब को मिले पहले रैंक को आधार बनाकर लगातार प्रचार कर रही है लेकिन विपक्ष पार्टी पर हमलावर है। कांग्रेस पार्टी समेत तमाम विपक्षी नेता इस बात की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं कि पंजाब में स्कूलों की रैंकिंग उनकी सरकार के समय भी अच्छी थी। 

 

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शिक्षा सबसे बड़ा नैरेटिव?

अभी चुनाव में समय है, लेकिन जिस तरह पंजाब सरकार स्कूलों और शिक्षा सुधार को लगातार राजनीतिक और प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में सामने रख रही है, उससे यह चर्चा जरूर शुरू हो गई है कि क्या दिल्ली की तरह पंजाब में भी शिक्षा को सत्ता वापसी के बड़े मॉडल के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिलहाल इतना साफ दिख रहा है कि पंजाब की राजनीति में स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि AAP के लिए सत्ता वापसी का केंद्र भी बन गए हैं। हालांकि, विपक्ष इसे सत्तारूढ़ दल के कोरे वादे करार दे रहा है।