असम की 31 जेलों में अप्रैल से जुलाई के बीच हुई एचआईवी जांच में 226 पॉजिटिव पाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें करीब 95 प्रतिशत मामले इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने से जुड़े हैं। अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि इन आंकड़ों से यह नहीं कहा जा सकता कि कैदियों को एचआईवी का संक्रमण जेल में ही हुआ है। कई लोगों में संक्रमण जेल आने से पहले का हो सकता है।
असम राज्य एड्स नियंत्रण समिति की ओर से जेलों में एचआईवी की नियमित जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान इन मामलों का पता चला। जेलों में रहने वाले कैदियों की समय-समय पर जांच की जा रही है ताकि अगर किसी में एचआईवी संक्रमण पाया जाता है तो उसे समय पर इलाज और जरूरी मदद मिल सके। जांच के बाद पॉजिटिव मिले कैदियों को इलाज और जरूरी सलाह दी जा रही है।
यह भी पढ़ें: पटना में ज्वेलरी महोत्सव शुरू, CM बोले- स्वर्णकारों को मिलेगी हर सुविधा
202 कैदियों का चल रहा इलाज
226 एचआईवी पॉजिटिव कैदियों में से 202 का एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) से इलाज चल रहा है। एआरटी एचआईवी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की थेरेपी है। जेलों में एआरटी की टीमें जाकर कैदियों को दवाएं और जरूरी सलाह दे रही हैं। इससे कैदियों को इलाज के लिए बार-बार जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम होती है।
अधिकारियों के मुताबिक, जेल से बाहर अस्पताल ले जाने में सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें होती हैं इसलिए कई जगह एआरटी की टीमें जेल में ही पहुंचकर कैदियों का इलाज कर रही हैं। जरूरत के हिसाब से कैदियों को आगे के इलाज के लिए अस्पताल भी भेजा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: दरभंगा में 200 करोड़ से बनेगा राष्ट्रीय खेल परिसर, मिलेंगी बड़ी सुविधाएं
श्रीभूमि जेल में भी मिले 11 मामले
श्रीभूमि जिला जेल में 445 कैदियों की जांच में 11 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। इस जेल की क्षमता 187 कैदियों की है लेकिन यहां 445 कैदी रखे गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, पॉजिटिव मिले ज्यादातर कैदी एनडीपीएस यानी नशीली दवाओं से जुड़े मामलों में बंद हैं।
जिन कैदियों को ज्यादा इलाज की जरूरत होती है उन्हें सिलचर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा जा रहा है। जेल में एचआईवी पॉजिटिव कैदियों को दवाओं के साथ काउंसलिंग भी दी जा रही है। काउंसलिंग के जरिए उन्हें बीमारी और इलाज से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाती है।
असम सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने यह पता लगाने के लिए जांच की बात कही है कि कैदियों में एचआईवी का संक्रमण किन वजहों से हुआ। स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल के मुताबिक, असम में करीब 33 हजार लोग एचआईवी/एड्स से प्रभावित हैं। उन्होंने लोगों से एचआईवी से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव नहीं करने की अपील भी की है।
