उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड की जांच में सामने आए फर्जी विद्युत सुरक्षा एनओसी मामले में अब कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है। विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर अलीगंज थाने में भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एफआईआर दर्ज होने के साथ ही अग्निकांड की जांच ने नया मोड़ ले लिया है और भवन मालिक की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय की आंतरिक जांच में सामने आया कि भवन मालिक द्वारा प्रस्तुत विद्युत सुरक्षा अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) विभागीय रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। जांच में पत्रांक, डिस्पैच नंबर, हस्ताक्षर, लिखावट और दस्तावेज का प्रारूप तक मूल अभिलेखों से अलग पाया गया। विभाग का आरोप है कि कूटरचना कर फर्जी एनओसी तैयार की गई और उसी के आधार पर बिजली का लोड बढ़वाया गया।
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जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई एफआईआर
विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर अलीगंज पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला के खिलाफ जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने के साथ पूरे मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाल रही है।
मामले में मुख्य आरोपी के भाई सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। अदालत ने सुनवाई के लिए 9 जुलाई की तारीख तय करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।
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15 मौतों के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
22 जून को अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद भवन की वैधता, फायर एनओसी, विद्युत सुरक्षा और अन्य स्वीकृतियों की जांच शुरू हुई थी। अब फर्जी विद्युत सुरक्षा एनओसी के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच और सख्त हो गई है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनका इस्तेमाल करने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।


