प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। उम्मीद है कि यहां से आम लोगों के लिए (कमर्शियल) उड़ानों का संचालन 17 अगस्त 2026 से शुरू हो जाएंगी। करीब 5,000 करोड़ रुपए की लागत से बने इस एयरपोर्ट का नाम महान भारतीय क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू के सम्मान में रखा गया है।अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
इस एयरपोर्ट की डिजाइन आंध्र प्रदेश की खास स्थानीय संस्कृति और विरासत को दर्शाती है। यहां आपको चुटि्टलू कॉटेज की छाप दिखेगी। इसके अलावा, एयरपोर्ट का निर्माण पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके किया गया है।
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आधुनिक सुविधाओं से लैस है एयरपोर्ट
बता दें कि यह हवाई अड्डा भारत के सबसे तेजी से पूरे हुए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में से एक है, जो तय समय से करीब 5 महीने पहले बनकर तैयार हुआ। इसे DGCA का लाइसेंस भी मिल चुका है। एयरपोर्ट GMR विशाखापट्टनम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने पीपीपी (PPP) मॉडल पर 2,703.26 एकड़ में बनाया है। खास बात यह है कि पहले फेज में इस एयरपोर्ट को सालाना 60 लाख यात्रियों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे 4 करोड़ यात्रियों तक बढ़ाने की योजना है।
इसके अलावा इसमें 3,800 मीटर लंबा कोड-ई रनवे है, जो बोइंग 777, 787 ड्रीमलाइनर और एयरबस A330 व A340 जैसे बड़े विमानों को संभाल सकता है। यह एयरपोर्ट विशाखापट्टनम, विजयनगरम और श्रीकाकुलम में विकास, पर्यटन, निवेश (इन्वेस्टमेंट) और रक्षा (डिफेंस) क्षेत्र को बढ़ावा देगा। इसमें 25,000 मीट्रिक टन क्षमता वाला कार्गो टर्मिनल भी है, जिसमें कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए कोल्ड चेन की सुविधा उपलब्ध है।
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खास डिजाइन, आधुनिक सुविधाओं से लैस
इस एयरपोर्ट का टर्मिनल आंध्र प्रदेश की संस्कृति और विरासत से प्रेरित है। छत का डिजाइन पारंपरिक 'चुट्टिलू कॉटेज' और इसकी बनावट फ्लाइंग फिश जैसी है, जो बंगाल की खाड़ी की समुद्री विरासत को दर्शाती है। इसके अलावा, छत पर पारंपरिक रंगोली के पैटर्न भी बनाए गए हैं। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI, बायोमेट्रिक पैसेंजर प्रोसेसिंग, ऑटोमेटेड बैगेज सिस्टम और एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशन सेंटर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
5,640 करोड़ से भी ज्यादा की लागत
5,640 करोड़ से भी ज्यादा की लागत से जीएमआर एयरपोर्ट्स द्वारा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इस एयरपोर्ट को विकसित किया गया है। यह भारत के सबसे तेजी से पूरे होने वाले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है। साथ ही पर्यावरण को देखते हुए इस एयरपोर्ट को सोलर पावर प्लांट, रेनवाटर हार्वेस्टिंग और ग्रीन बिल्डिंग मानकों के तहत तैयार किया गया है।
