असम में पिछले 24 घंटे में बाढ़ की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है। बाढ़ की चपेट में आने से 7 और लोगों की मौत हो गई है। असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बाढ़ से अब भी 3.32 लाख लोग प्रभावित हैं। अधिकारियों ने बताया कि असम में मानसून के दौरान बाढ़ की घटना के चलते अब तक 75 लोगों की जान जा चुकी है। असम सरकार ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए सोमवार को लगभग 75,000 रुपये प्रति परिवार की अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी की है।

 

वहीं, अधिकारियों के अनुसार ऊपरी असम में आई भीषण बाढ़ का असर लगातार गंभीर बना हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 85 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई परिवारों के घर, फसलें और जरूरी सामान बाढ़ में बह गए हैं। सरकार राहत और बचाव कार्य तेजी से चला रही है तथा प्रभावित इलाकों में लोगों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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मुख्यमंत्री ने जारी की पहली किस्त

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा सर्वाधिक प्रभावित जिलों के दौरे पर हैं। उन्होंने डिब्रूगढ़ से अंतरिम राहत की पहली किस्त जारी की है। अधिकारियों के अनुसार शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में जिन परिवारों के मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्हें पहली किस्त के तहत 15,000 रुपये प्रति परिवार दिए जाएंगे। इसके अलावा अन्य सहायता भी प्रदान की जाएगी जिससे कुल राहत राशि 75,000 रुपये प्रति परिवार होगी। मुख्यमंत्री सोमवार को शिवसागर जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करेंगे और बाढ़ प्रभावित लोगों से भी मुलाकात करेंगे।

 

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कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?

रविवार को बाढ़ से तीन और लोगों की जान चली गई। ये तीनों शिवसागर जिले से हैं जो मौजूदा बाढ़ की लहर में प्रभावित जिलों में शामिल है। राज्य के चराइदेव जिले में कुल 1.42 लाख लोग अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें चराइदेव सबसे अधिक प्रभावित रहा। शिवसागर में 97 हजार 74 और जोरहाट में करीब 57 हजार 37 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही इस साल असम में बाढ़ की घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है।


प्रशासन की ओर से पांचों जिलों में कुल 54 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जहां वर्तमान में 13,771 लोगों को आश्रय और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, प्रभावित जिलों में 15,422 हेक्टेयर कृषि भूमि अब भी जलमग्न है। अधिकारियों ने बताया कि गोलाघाट जिले के नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।