कर्नाकट की राजधानी बेंगलुरु में हत्याकांड की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले के मुख्य आरोपी ने हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए पिछले 6 महीनों तक एआई चैटबॉट की मदद ली। अब बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए संबंधित एआई कंपनी को पत्र लिखकर आरोपी की चैट हिस्ट्री मांगी है।

 

यह मामला 22 जून को बेंगलुरु के के.आर. पुरम थाना क्षेत्र के सीगेहल्ली स्थित एक अपार्टमेंट का है। यहां 52 वर्षीय सोमसुंदर, उनकी 48 वर्षीय पत्नी मुथुलक्ष्मी और 19 वर्षीय छोटी बेटी सुप्रिया की चाकू से मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि इस वारदात के पीछे परिवार की बड़ी बेटी और उसका लिव-इन पार्टनर शामिल था।

 

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पैसों का विवाद बना हत्या की वजह

पुलिस के अनुसार वारदात के कुछ दिन बाद मृतक दंपति की बड़ी बेटी 24 वर्षीय श्वेता और उसका लिव-इन पार्टनर 25 वर्षीय केनेथ को पुडुचेरी से अलग-अलग गिरफ्तार किया गया। दोनों घटना के बाद वहां जाकर छिप गए थे लेकिन जांच के दौरान पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है।

 

जांच में पता चला कि इस हत्याकांड के पीछे पारिवारिक स्ट्रेस और पैसों का विवाद था। पुलिस के मुताबिक, श्वेता अपनी मां के सख्त और ज्यादा नियंत्रण रखने वाले व्यवहार से नाराज थी। इसके अलावा श्वेता ने अपने लिव-इन पार्टनर केनेथ के क्लाउड किचन बिजनेस के लिए अपनी मां से 50 लाख रुपये उधार लिए थे। यह रकम खर्च हो चुकी थी और दोनों को पैसे वापस करने का डर सताने लगा था। पुलिस का मानना है कि इस वजह से उन्होंने इस वारदात की साजिश रची।

 

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आरोपी ने AI चैटबॉट से ली हर कदम पर सलाह

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हत्या की पूरी योजना बनाने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका केनेथ की थी। जांच में पता चला है कि उसने पिछले करीब 6 महीनों तक एआई चैटबॉट से लगातार सलाह ली। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने चैटबॉट से हत्या करने के तरीके, शवों को ठिकाने लगाने, खून के धब्बे साफ करने और सबूत मिटाने जैसे कई सवाल पूछे थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने क्लाउड किचन में इस्तेमाल होने वाली भट्ठी में शवों को जलाने की संभावना के बारे में भी एआई चैटबॉट से जानकारी मांगी थी। 

 

इस खुलासे के बाद बेंगलुरु पुलिस ने संबंधित एआई कंपनी को पत्र भेजकर आरोपी की चैट हिस्ट्री और उससे जुड़ी अन्य जानकारी मांगी है। पुलिस का कहना है कि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आरोपी ने किस तरह की जानकारी हासिल की और उसने वारदार की योजना कैसे बनाई।