नेपाल के जंगलों से भटककर एक गैंडा बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में पहुंच गया है। बगहा के मंगूराहा वन क्षेत्र के इनरवा गांव स्थित एक गन्ने के खेत में गैंडा दिखाई देने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही एसएसबी की 44वीं बटालियन के नगरदेही कैंप और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने गैंडे की लोकेशन ट्रैक कर निगरानी शुरू कर दी है। गैंडे को आबादी वाले इलाके में जाने से रोकने के लिए एसएसबी के हवलदार नंदकिशोर कुशवाहा, एसओजी टीम के दीपक कुमार समेत अन्य जवानों ने खेत के आसपास घेराबंदी कर दी है। वन विभाग के रेंजर पंकज कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि गैंडा नेपाल के जंगलों से भटककर भारतीय सीमा में पहुंचा है।
फिलहाल गैंडा गन्ने की फसल में छिपा हुआ है। नेपाल वन विभाग को भी इसकी सूचना दे दी गई है और वहां से टीम को बुलाया गया है। सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों से अपील की गई है कि वह खेतों की ओर न जाएं और गैंडे को उकसाने की कोशिश बिल्कुल न करें। गैंडे को सुरक्षित पकड़कर वापस नेपाल भेजने के लिए वन विभाग की टीम दिनभर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी रही। मंगूराहा वन क्षेत्र के रेंजर पंकज कुमार के नेतृत्व में फॉरेस्टर विद्यासागर, वनरक्षी मनीष कुमार और वन विभाग के अन्य कर्मी मौके पर डटे हुए हैं।
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टीम ने गैंडे की हर गतिविधि पर नजर रखी और उसे बेहोश कर पकड़ने की रणनीति बनाई। इसी दौरान रेस्क्यू के प्रयास में एक हादसा भी हो गया। नेपाल से आई वन विभाग की टीम के वनकर्मी एन बहादुर बस्नेत गैंडे के हमले में घायल हो गए। आनन-फानन उन्हें इलाज के लिए नेपाल पुलिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। रेंजर पंकज कुमार ने कहा कि गैंडा जंगली जानवर है और घबराहट में हमला कर सकता है। इसलिए रेस्क्यू बेहद सावधानी से किया जा रहा है। भारतीय और नेपाली वनकर्मी मिलकर ऑपरेशन चला रहे हैं ताकि गैंडे को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ा जा सके।
गैंडे को पकड़कर नेपाल भेजने की तैयारी
गैंडे के खेत में होने की खबर फैलते ही आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। इनरवा और आसपास के किसान गन्ने के खेतों में जाने से डर रहे हैं। कई किसानों की फसल भी गैंडे ने चर ली है। ग्रामीणों का कहना है कि गैंडा पिछले दो दिनों से इलाके में देखा जा रहा था लेकिन सोमवार को वह खेत के बीच में बैठ गया। इसके बाद वन विभाग और एसएसबी की टीम ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। वन विभाग ने लाउडस्पीकर से गांव में ऐलान करवाया है कि लोग खेतों की ओर न जाएं और बच्चों को भी वहां न भेजें।
वनकर्मियों ने खेत के आसपास बैरिकेडिंग कर दी है और एसएसबी के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। रेंजर ने बताया कि गैंडे को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में डालने के बाद सुरक्षित तरीके से नेपाल के जंगल में छोड़ने की योजना है। इसके लिए नेपाल से विशेषज्ञ टीम और जरूरी उपकरण मंगाए गए हैं। वन विभाग की टीम लगातार गैंडे की गतिविधियों पर नजर रख रही है ताकि वह आबादी वाले इलाके में न पहुंच सके।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मानसून के बाद अक्सर नेपाल के जंगलों से गैंडे, हाथी और दूसरे जंगली जानवर भोजन और पानी की तलाश में भारतीय सीमा में आ जाते हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में ऐसा पहले भी होता रहा है। हालांकि गैंडे का खेत में आ जाना लोगों के साथ-साथ उसके लिए भी खतरा हो सकता है। रेंजर पंकज कुमार ने बताया कि भारतीय और नेपाली वन विभाग की संयुक्त टीम मौका मिलते ही गैंडे को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू करेगी। तब तक लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाह न फैलाएं और वन विभाग की टीम का सहयोग करें। प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
