बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में उड़ान योजना 6.0 की समीक्षा बैठक की। इसमें राज्य के 5 जिलों में नए एयरपोर्ट और 6 जिलों में हेलीपैड बनाने का फैसला लिया गया। सरकार का कहना है कि इससे हवाई सफर आसान होगा और पर्यटन, व्यापार, उद्योग, निवेश, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
बैठक में सिविल विमानन विभाग के सचिव नीलेश रामचन्द्र देवरे ने राज्य में क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि केंद्र की संशोधित उड़ान योजना 6.0 का फोकस छोटे शहरों और कम हवाई सेवा वाले इलाकों को हवाई सुविधा से जोड़ना है। इसके तहत ऐसे क्षेत्रों में हवाई सेवा शुरू करने पर जोर दिया जा रहा है जहां अभी लोगों को सफर के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
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इन जगहों पर बनेंगे एयरपोर्ट और हेलीपैड
प्रस्तुतीकरण के बाद मुख्यमंत्री ने 5 स्थानों पर हवाई सुविधाएं विकसित करने का निर्देश दिया। इसके तहत गोपालगंज के सबेया, अररिया के फारबिसगंज, किशनगंज, सारण और बेगूसराय के उलाव में नए एयरपोर्ट बनेंगे। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि इन स्थानों पर जमीन की उपलब्धता, तकनीकी उपयुक्तता और यात्री संभावनाओं का आकलन जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने को कहा। उनका कहना था कि ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दी जाए जहां से आसपास के जिलों और महत्वपूर्ण पर्यटन, धार्मिक तथा आर्थिक केंद्रों को भी लाभ मिले।
हवाई अड्डों के साथ राज्य में हेलीपैड का नेटवर्क भी तैयार होगा। मुख्यमंत्री ने औरंगाबाद, बांका, खगड़िया, नवादा, शेखपुरा और सीतामढ़ी में हेलीपैड विकसित करने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया। धार्मिक और पर्यटन सर्किट को जोड़ने के लिए विशेष हेलीपैड भी बनेंगे। इसमें राजगीर और गया के बीच, सासाराम और कैमूर के बीच तथा शाहाबाद क्षेत्र शामिल हैं। सीएम ने कहा कि इससे बोधगया, राजगीर, नालंदा जैसे स्थलों तक पर्यटकों की पहुंच आसान होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि हवाई कनेक्टिविटी बिहार के विकास की रीढ़ बनेगी। जब हवाई सेवा छोटे शहरों तक पहुंचेगी तो उद्योगपति निवेश के लिए आगे आएंगे। गया और बोधगया में पहले से अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं। नई कनेक्टिविटी से राजगीर, वैशाली जैसे स्थलों पर भी पर्यटन बढ़ेगा। इससे होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार को सीधा फायदा होगा और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षेत्रीय संपर्क योजना के अनुरूप बिहार की जरूरतों के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के नागर विमानन मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ समन्वय कर जल्द मंजूरी ली जाए।
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क्या है उड़ान योजना 6.0
केंद्र सरकार की उड़ान योजना का मकसद छोटे शहरों को सस्ती हवाई सेवा से जोड़ना है। इस योजना के तहत सरकार एयरलाइंस को वायबिलिटी गैप फंडिंग देती है ताकि 500 किमी तक की दूरी के लिए किफायती किराए पर उड़ानें शुरू हो सकें। बिहार में पहले से दरभंगा एयरपोर्ट संचालित है। पूर्णिया और रक्सौल में एयरपोर्ट के निर्माण का काम चल रहा है। अब 5 नए एयरपोर्ट जुड़ने से राज्य का हवाई नक्शा और मजबूत होगा। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को 4 मुख्य निर्देश दिए। पहला, हवाई अड्डे और हेलीपैड के लिए जमीन की उपलब्धता और उपयुक्तता का सर्वे 1 महीने में पूरा किया जाए। दूसरा, संबंधित जिलों के डीएम के साथ बैठक कर जमीन और अन्य संसाधन सुनिश्चित किए जाएं। तीसरा, केंद्र के नागर विमानन मंत्रालय और एएआई के साथ समन्वय कर डीपीआर तैयार कर भेजा जाए। चौथा, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर हवाई सेवा से जोड़ा जाए।
सीएम के ऐलान के बाद संबंधित जिलों के नेताओं और व्यापारिक संगठनों ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि सीमांचल, शाहाबाद और मिथिला क्षेत्र को सीधी हवाई कनेक्टिविटी मिलने से विकास को नई गति मिलेगी। इलाज, शिक्षा और व्यापार के लिए बाहर जाना आसान होगा। साथ ही नए उद्योग लगने से युवा पलायन रुकेगा। सिविल विमानन विभाग ने सभी चिन्हित स्थानों पर सर्वे टीम भेज दी है। अधिकारियों का अनुमान है कि जमीन उपलब्ध होने के बाद एयरपोर्ट निर्माण में 2 से 3 साल और हेलीपैड 1 साल के अंदर तैयार हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित बिहार के लक्ष्य को पाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। हवाई कनेक्टिविटी उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
