बिहार में तालाब, पोखर, आहर और पईन को अतिक्रमण से मुक्त कराना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की टॉप प्रायोरिटी है। सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा। विभाग इसके लिए अलग सेल बनाकर मॉनिटरिंग करेगा। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने यह बड़ा ऐलान किया।

 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से राजस्व सर्वे (प्रशिक्षण) संस्थान में जल-जीवन-हरियाली दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं जैसे तालाब, पोखर, आहर और पईन को चिन्हित कर अतिक्रमण मुक्त कराने के विषय पर विस्तृत परिचर्चा आयोजित की गई। मंत्री ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मंत्री ने कहा, 'राज्य में सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं की पहचान कर उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराना विभाग की प्राथमिकता है। तालाब, पोखर, आहर और पईन जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक जल संरचनाएं पर्यावरण संरक्षण, भू-जल स्तर को बनाए रखने और आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।'

 

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तालाब-पोखर पर्यावरण के लिए जरूरी

गांव-गांव में यही जल स्रोत लोगों की प्यास बुझाते हैं, खेतों की सिंचाई करते हैं और भू-जल स्तर को रिचार्ज करते हैं लेकिन अतिक्रमण के कारण ये संरचनाएं खत्म हो रही हैं। मंत्री ने कहा, 'जल स्रोतों और सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण गंभीर विषय है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ऐसे मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करेगा और चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा। अब तक कई जगहों पर तालाबों पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है, जबकि आहर-पईन को पाटकर खेती की जा रही है। ऐसे सभी मामलों में सख्त कार्रवाई होगी।'

 

उन्होंने इस कार्य में लगे सभी 15 विभागों की ओर से किए जा रहे कार्यों को और बेहतर तरीके से करने के लिए टीम के अन्य सदस्यों से उनके विचार जाने। मंत्री ने कहा, 'इस दिशा में हम सभी को आगे की सोच के साथ काम करने की जरूरत है।'

 

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चर्चा करते हुए जायसवाल ने कहा, 'उनकी सोच से यह अभियान धरती पर उतरा। इसका परिणाम भी सामने है। आज हरित पट्टी और जल संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने में सकारात्मक परिणाम मिला है। जल-जीवन-हरियाली अभियान आज पूरे देश के लिए मॉडल बन गया है।'

 

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अलग सेल बनाकर होगी मॉनिटरिंग

इस अवसर पर विभाग के सचिव जय सिंह ने कहा, 'सार्वजनिक जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त कराने के कार्य की प्रभावी निगरानी के लिए विभाग अलग सेल बनाकर मॉनिटरिंग करेगा। तालाबों, पोखरों, आहरों और पईनों सहित अन्य सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं की पहचान और उनके संरक्षण के लिए विभागीय स्तर पर जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।'

 

सचिव ने कहा, 'सभी जिलों के डीएम और सीओ को निर्देश दिया जाएगा कि वह अपने-अपने क्षेत्र के जल निकायों की सूची तैयार करें। राजस्व नक्शा और खतियान के आधार पर इनकी पहचान होगी। कहां-कहां अतिक्रमण है इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होगी। इसके लिए अंचल अधिकारी, थाना और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम बनाई जाएगी।'

 

जय सिंह ने कहा, 'जल निकाय केवल प्राकृतिक संसाधन ही नहीं बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इसलिए इन संरचनाओं को संरक्षित रखना और अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।' उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों से इस दिशा में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए।'

 

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15 विभागों की टीम करेगी काम

जानकारी के अनुसार, जल-जीवन-हरियाली अभियान में कुल 15 विभाग शामिल हैं। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार, जल संसाधन, लघु जल संसाधन, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, नगर विकास, कृषि, उद्यान सहित अन्य विभाग शामिल हैं। राजस्व विभाग को अतिक्रमण चिन्हित करने और उसे हटाने की मुख्य जिम्मेदारी दी गई है। अतिक्रमण हटाने के बाद संबंधित विभाग तालाबों का जीर्णोद्धार, सौंदर्यीकरण और वृक्षारोपण करेंगे।

 

पटना जिले में ही 2000 से अधिक तालाब-पोखर चिन्हित हैं जिनमें से 30 फीसदी पर अतिक्रमण है। पूरे राज्य में 50 हजार से अधिक जल निकाय हैं। सरकार का लक्ष्य है कि अगले एक साल में सभी जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त कर दिया जाए।