बिहार में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। गंगा, गंडक, कोसी और पुनपुन समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। राज्य के 11 जिलों के 50 प्रखंडों की 201 पंचायतों में करीब 10.26 लाख की आबादी बाढ़ से घिर गई है। सरकार की ओर से अब तक 1.21 लाख बाढ़ पीड़ितों को दो टाइम गर्म भोजन कराया गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन जिलों के निचले इलाकों में पानी घुस गया है। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है। लोगों के घरों में 3 से 4 फीट तक पानी है। लोग छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
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858 नावों से हो रहा रेस्क्यू
बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 858 नावों का परिचालन शुरू किया है। इन नावों के जरिए फंसे हुए लोगों को निकाला जा रहा है। उनके लिए दवा, भोजन और पानी पहुंचाया जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सरकार अलर्ट है। प्रभावित क्षेत्रों में 50 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार लोगों का इलाज कर रही है।
बाढ़ में बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए 19 बोट एंबुलेंस भी चलाई जा रही हैं, जो पानी में घिरे लोगों तक तुरंत पहुंच रही हैं। इसके अलावा 36 पशु चिकित्सा शिविर भी संचालित किए जा रहे हैं, ताकि बाढ़ में फंसे मवेशियों का इलाज हो सके। अब तक 12 हजार से ज्यादा पॉलीथीन शीट और 2300 ड्राई राशन पैकेट का वितरण किया जा चुका है, ताकि लोगों को रहने और खाने में दिक्कत न हो।
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1.21 लाख लोगों को कराया भोजन
बाढ़ में सबसे बड़ी समस्या भोजन की होती है। इसे देखते हुए विभिन्न जिलों में कुल 38 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन रसोई केंद्रों में सुबह-शाम गर्म भोजन बनाया जा रहा है और अब तक लगभग 1.21 लाख लोगों को थाली में भोजन कराया गया है। वैशाली जिले में एक बड़ा राहत शिविर भी चलाया जा रहा है, जहां करीब 326 बाढ़ पीड़ितों के लिए रहने, खाने और इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है।
गंगा HFL से ऊपर, सारण में तटबंध टूटा
नदियों के जलस्तर की बात करें तो स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर, बंका घाट में 49.45 मीटर और पंडारक में 43.79 मीटर दर्ज किया गया है, जो सर्वोच्च जलस्तर यानी HFL से ऊपर है। गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा नदी भी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
सारण जिले में माही नदी के त्रिलोकचक में 20 मीटर में तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। सूचना मिलते ही मौके पर SDRF की टीम को भेजा गया है और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक में 1.26 लाख क्यूसेक, बीरपुर बराज पर कोसी में 1.77 लाख क्यूसेक और इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी में 3.07 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया है।
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NDRF-SDRF की 34 टीमें तैनात
राज्य में NDRF की 7 और SDRF की 27 टीमों को प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है। टीमें लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।बिहार के राजधानी पटना में जलजमाव रोकने के लिए भी तैयारी तेज है। पटना शहर के सभी 56 ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन चालू कर दिए गए हैं। नगर निगम के 6 अंचलों में 94 अतिरिक्त पंप 7.5 एचपी से 83 एचपी के लगाए गए हैं, जो दिन-रात पानी निकालने में जुटे हैं। पटना और दानापुर कैनाल में जल संसाधन विभाग ने डिस्चार्ज बंद कर दिया है, ताकि शहर की जल निकासी पर दबाव न पड़े। गंगा से बैक फ्लो रोकने के लिए 13 छोटे नालों पर स्लूस गेट बंद कर दिए गए हैं।
