संजय सिंह, पटना। बिहार पुलिस ने तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा और हाईटेक कदम उठाया है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया हैकिंग जैसे मामलों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक नई विशेष यूनिट बनाई है। इस यूनिट का नाम सीसीएसयू रखा गया है। दावा किया जा रहा है कि यह टीम अब साइबर अपराधियों के खिलाफ डिजिटल स्तर पर डिजिटल लड़ाई लड़ेगी।

 

अब तक बिहार में साइबर अपराधों की जांच ईओयू के जिम्मे थी, लेकिन लगातार बदलते साइबर अपराध के तरीकों और बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने साइबर विंग को अलग कर स्वतंत्र यूनिट का दर्जा दे दिया है। नई सीसीएसयू सीधे पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर काम करेगी और पूरे राज्य में साइबर नेटवर्क पर निगरानी रखेगी।

118 सदस्यों की हाईटेक टीम

नई यूनिट में कुल 118 पुलिसकर्मियों की विशेष टीम तैनात की गई है। इसमें 53 अधिकारी और 65 जवान शामिल हैं। अधिकारियों में 7 इंस्पेक्टर, 42 सब-इंस्पेक्टर और 4 सार्जेंट को जिम्मेदारी दी गई है। अलग-अलग जिलों से तकनीकी रूप से दक्ष जवानों का चयन किया गया है, जो साइबर जांच और डिजिटल ऑपरेशन में मदद करेंगे।

 

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तकनीक में माहिर होंगे अधिकारी

पुलिस मुख्यालय के मुताबिक, इस यूनिट में उन्हीं अधिकारियों और जवानों को शामिल किया गया है जिनकी तकनीकी समझ बेहतर है और जिन्होंने साइबर ट्रेनिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। टीम को एडवांस सॉफ्टवेयर, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और आधुनिक साइबर तकनीकों से लैस किया जाएगा ताकि अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

बिहार से बाहर और विदेशों तक पहुंचेगी जांच

साइबर अपराध अब सिर्फ एक जिले या राज्य तक सीमित नहीं रह गए हैं। कई मामलों के तार दूसरे राज्यों और विदेशों तक जुड़े होते हैं। ऐसे में सीसीएसयू की टीम अन्य राज्यों की पुलिस और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। इससे साइबर ठगों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है।

बढ़ते साइबर फ्रॉड ने बढ़ाई चिंता

बीते कुछ वर्षों में बिहार में साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। फर्जी बैंक कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर ठगी, फेक लिंक भेजकर खाते खाली करना, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई परिवार अपनी जीवनभर की जमा पूंजी गंवा चुके हैं।

सिर्फ कार्रवाई नहीं, जागरूकता भी सीसीएसयू केवल अपराधियों पर कार्रवाई ही नहीं करेगी, बल्कि लोगों को जागरूक बनाने का अभियान भी चलाएगी। पुलिस का मानना है कि अगर लोग साइबर ठगी के तरीकों को समझेंगे, तो कई अपराध शुरुआती स्तर पर ही रोके जा सकेंगे।

 

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आधुनिक साइबर लैब से होगी निगरानी

सूत्रों के अनुसार, नई यूनिट को जल्द आधुनिक साइबर लैब, एडवांस सर्विलांस टूल्स और डेटा मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, मोबाइल नेटवर्क, सोशल मीडिया गतिविधियों और संदिग्ध डिजिटल मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी।

डिजिटल अपराधियों के खिलाफ डिजिटल युद्ध

बिहार पुलिस अब पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित कार्रवाई की तैयारी में है। नई हाईटेक यूनिट बनने के बाद उम्मीद की जा रही है कि साइबर ठगी के मामलों में तेजी से कमी आएगी और लोगों का डिजिटल दुनिया पर भरोसा मजबूत होगा।