छत्तीसगढ़ में गांवों के विकास और पंचायत व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 से 2022-23 तक पांच साल में राज्य सरकार ने राज्य वित्त आयोग (SFC) की सिफारिश के मुताबिक पंचायतों को पूरी रकम नहीं दी। इसकी वजह से पंचायतों को 3,243.46 करोड़ रुपये कम मिले, जिसका सीधा असर गांवों में विकास कार्यों और सड़क, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पंचायत विभाग वित्तीय संसाधनों की कमी के साथ-साथ कर्मचारियों की भारी कमी से भी जूझ रहा है। संचालनालय से लेकर जिला, जनपद और ग्राम पंचायत स्तर तक बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इससे योजनाओं के संचालन, वित्तीय रिकॉर्ड तैयार करने और प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ रहा है।
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पंचायतों को नहीं मिला हक का पैसा
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 से 2022-23 के बीच राज्य वित्त आयोग ने सिफारिश की थी कि पंचायतों को राज्य के शुद्ध कर राजस्व से 7,409.52 करोड़ रुपये दिए जाएं। सरकार ने सिर्फ 4,166.06 करोड़ रुपये ही जारी किए। यानी पंचायतों को करीब 43.77% कम पैसा मिला। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भू-राजस्व, भू-राजस्व उपकर और उत्पाद शुल्क अधिभार से मिलने वाला उनका हिस्सा भी नहीं दिया गया। इसका असर गांवों के विकास पर पड़ा है। पंचायतों को समय पर पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं मिलने से ग्रामीण सड़क, पेयजल, स्वच्छता और अन्य विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं।
61 फीसदी पद पड़े खाली
रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायत विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। संचालनालय, जिला और जनपद पंचायतों में कुल 2,260 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें सिर्फ 872 पर ही कर्मचारी तैनात हैं। यानी 1,388 पद, करीब 61% सीटें खाली पड़ी हैं। वहीं ग्राम पंचायतों में 11,656 स्वीकृत पदों के मुकाबले 10,378 सचिव ही काम कर रहे हैं। इसका मतलब है कि 1,278 ग्राम पंचायतों में सचिव ही नहीं हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण लेखा-जोखा, स्टॉक रजिस्टर, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का रखरखाव भी प्रभावित हो रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
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जिला योजना समितियां भी नहीं कर सकीं बैठक
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि वर्ष 2018-23 के दौरान जांचे गए आठ जिलों में जिला योजना समिति (DPC) की एक भी अनिवार्य बैठक नहीं हुई। इन समितियों का काम पंचायतों और नगर निकायों की योजनाओं को जोड़कर जिला विकास योजना तैयार करना होता है। इसके अलावा, 36 ग्राम पंचायतों की जांच में पाया गया कि कई ग्राम सभाओं में जरूरी कोरम पूरा नहीं हुआ, फिर भी बैठकों को मान्य माना गया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। CAG की रिपोर्ट से साफ है कि वित्तीय संसाधनों की कमी, खाली पदों और प्रशासनिक लापरवाही ने राज्य की पंचायती राज व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
