गुजरात के सूरत में कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (CDRC) ने कार मालिक चिराग देसाई को बीमा कंपनी से 1 लाख 25 हजार रुपये का मुआवजा देने का बड़ा फैसला सुनाया है। मामला तब शुरू हुआ जब बीमा कंपनी ने एक्सीडेंट के ठोस सबूत न होने का हवाला देते हुए चिराग देसाई का क्लेम रिजेक्ट कर दिया था लेकिन कमीशन ने कार के नुकसान को पुख्ता आधार मानते हुए कंपनी को मुआवजे के साथ हर्जाना और शिकायत का खर्च भरने का कड़ा निर्देश दिया है।
कार मालिक चिराग देसाई ने 18 अक्टूबर 2022 को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से अपनी कार का बीमा करवाया था। इस कार की कुल कीमत यानी आईडीवी 3 लाख 10 हजार रुपये तय की गई थी, जिसके लिए उन्होंने 6853 रुपये का प्रीमियम जमा किया था। देसाई के मुताबिक, 20 जून 2023 को नवसारी के पास उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया था जिससे कार बुरी तरह टूट गई थी। घटना के तुरंत बाद उन्होंने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए आवेदन किया था।
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बीमा कंपनी का क्लेम ठुकराने का कारण
बीमा कंपनी ने मामले की जांच करवाई और 27 जुलाई 2023 को क्लेम देने से मना कर दिया। कंपनी का कहना था कि नुकसान कैसे हुआ, यह साफ नहीं है और कुछ जानकारी छुपाई गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद पुलिस में कोई शिकायत या एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई थी। कंपनी ने एक अलग से जाँच करवाई, जिसमें रिपोर्ट आई कि कार के डैशबोर्ड को हुआ नुकसान ट्रक से टक्कर की कहानी से मेल नहीं खाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सीडेंट की जगह, ड्राइवर को लगी चोट और घटना के समय में काफी अंतर था। इसके अलावा, ड्राइवर को कोई चोट नहीं आई थी और उसने कोई मेडिकल इलाज भी नहीं लिया था। इस घटना का कोई गवाह भी नहीं मिला और कार को एक्सीडेंट के चार दिन बाद रिपेयर के लिए भेजा गया था।
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कमीशन ने क्या फैसला सुनाया?
मामला जब कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन के पास पहुंचा, तो चिराग देसाई एक्सीडेंट का कोई पक्का सबूत नहीं दे पाए। वे न तो उस ट्रक का नंबर बता सके जिससे टक्कर हुई थी और न ही ड्राइवर की पहचान बता पाए। फिर भी, कमीशन ने बीमा कंपनी के उस सर्वे वाले पेपर को आधार माना, जिसमें कार के नुकसान का हिसाब 1.25 लाख रुपये लगाया गया था।
कमीशन ने कहा कि बीमा कंपनी ने नुकसान की बात पहले ही मान ली थी, इसलिए क्लेम को पूरी तरह से खारिज करना गलत है। आखिर में कमीशन ने बीमा कंपनी को 1.25 लाख रुपये का बीमा क्लेम देने और मानसिक परेशानी के लिए 15,000 रुपये का एक्स्ट्रा हर्जाना देने का आदेश दे दिया।


