देश में साइबर स्टॉकिंग और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इनको लेकर कोर्ट भी अब पहले से ज्यादा सख्त नजर आ रहे हैं। इसी बीच राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ऐसा फैसला दिया है जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। कोर्ट ने साइबर स्टॉकिंग के एक आरोपी को जमानत तो दे दी लेकिन साथ ही उसके सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूरे एक साल की रोक लगा दी।आमतौर पर कोर्ट इस तरह की रोक नहीं लगाते लेकिन राजस्थान होई कोर्ट ने जमानत की शर्त में सोशल मीडिया का इस्तेमाल ना करना प्रमुखता से रखा है। 

 

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर आरोपी इस दौरान किसी भी नाम या फर्जी आईडी से सोशल मीडिया चलाते पकड़ा गया, तो उसकी बेल तुरंत रद्द कर दी जाएगी। साइबर स्टॉकिंग के बढ़ते मामलों के बीच कोर्ट ने यह फैसला दिया है। 

 

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक नाबालिग लड़की से जुड़ा हुआ है। इस मामले में लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि फरवरी महीने के दौरान आरोपी लगातार सोशल मीडिया के जरिए लड़की का पीछा कर रहा था, उसे परेशान कर रहा था और सोशल मीडिया पर ही उसे गलत मैसेज भेज रहा था। लड़की के पिता ने पहले तो इस मामले में लड़के को समझाने की कोशिश की थी लेकिन बाद में पुलिस के जरिए कानूनी कार्रवाई की। 

 

लड़की के पिता से मिली शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में साइबर स्टॉकिंग और पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ की। इसके साथ ही सोशल मीडिया के जरिए भेजे गए मैसेज की भी जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट भी कोर्ट में पेश कर दी गई। 

जमानत पर लगाई शर्तें

सुनवाई के दौरान कोर्ट में दलील दी कि जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब आरोपी से पूछताछ की जरूरत नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और वह ट्रायल में पूरा सहयोग करेगा। दूसरी तरफ पीड़िता के परिवार और सरकारी वकील ने अदालत से कहा कि आरोपी की हरकतों ने लड़की की मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। कोर्ट के सामने यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क और उत्पीड़न ने पीड़िता की सामान्य जिंदगी प्रभावित कर दी। 

 

राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत दी लेकिन कई कड़ी शर्तें भी लगा दीं। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पीड़िता या उसके परिवार से संपर्क नहीं करेगा। वह इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, व्हाट्सऐप जैसे किसी भी माध्यम से कोई मैसेज नहीं भेजेगा। इतना ही नहीं कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर एक साल की रोक लगा दी है।

 

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शर्तें बनी चर्चा का विषय

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पूरे देश में चर्चा हो रही है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है। दरअसल, कोर्ट अब यह मानने लगे हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ बातचीत का माध्यम नहीं रहे, बल्कि अपराध के नए रास्ते भी बनते जा रहे हैं। खासतौर पर महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ साइबर स्टॉकिंग, ऑनलाइन धमकी और मानसिक उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।