हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों के किनारे खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही पार्बती पावर स्टेशन-2 और एडी हाइड्रो पावर लिमिटेड (ADHPL) की ओर से पानी छोड़े जाने को लेकर अलग-अलग एडवाइजरी जारी की गई है। ऐसे में प्रशासन और परियोजना प्रबंधन ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी नदी-नालों से दूर रहने की हिदायत दी है।

 

पार्बती पावर स्टेशन-2 (800 मेगावाट) की ओर से जारी सूचना के अनुसार, जलाशय का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पानी की भारी की संभावना है। इसके मद्देनजर 11 अगस्त को सुबह 10:30 बजे पुलगा बांध से करीब 30 क्यूमेक पानी पार्वती नदी में छोड़ा जाएगा। इसके बाद 10:50 बजे करीब 30 क्यूमेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। इससे पार्वती नदी में ई-फ्लो और रेडियल गेट डिस्चार्ज समेत कुल पानी का बहाव करीब 90 क्यूमेक तक पहुंच सकता है। यदि पानी की आवक में और वृद्धि होती है तो बांध के रेडियल गेटों से  पानी भी छोड़ा जा सकता है। इससे पार्वती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की संभावना है।

 

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अलेन नाले में फ्लशिंग ऑपरेशन

इसी बीच एडी हाइड्रो पावर लिमिटेड (ADHPL), मनाली की ओर से भी अलेन नाले में नियंत्रित फ्लशिंग ऑपरेशन की सूचना जारी की गई है। यह ऑपरेशन 12 अगस्त को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा। इस दौरान अलेन नाले में अंडर स्लुइस और चैंबर्स की नियंत्रित फ्लशिंग की जाएगी। शुरुआत में करीब 16 क्यूमेक पानी छोड़ा जाएगा, जिसे ऑपरेशन के दौरान धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।

सायरन से मिलेगा अलर्ट

जलविद्युत परियोजनाओं ने आम लोगों, पर्यटकों, श्रमिकों और अन्य लोगों से नदी-नालों के किनारों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। विशेष रूप से होटल, गेस्ट हाउस, होमस्टे और कैंप संचालकों के साथ टैक्सी ऑपरेटरों से पर्यटकों को पानी छोड़े जाने की जानकारी देने और उन्हें नदी किनारे न जाने के लिए सचेत करने को कहा गया है। पार्बती पावर स्टेशन-2 की ओर से बताया गया है कि लोगों को चेतावनी देने के लिए हूटर और सायरन बजाए जाएंगे। साथ ही अनाउंसमेंट वाहन के माध्यम से भी आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क किया जाएगा।

 

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परियोजना प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि पानी की आवक बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त पानी भी छोड़ा जा सकता है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे जाकर बढ़ते जलस्तर को देखने का जोखिम न उठाएं और प्रशासन व परियोजना प्रबंधन की चेतावनियों का पालन करें। बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। ऐसे में पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सतर्कता ही किसी अप्रिय घटना को रोकने में अहम भूमिका निभा सकती है।