उत्तराखंड के देहरादून में दिव्यांग छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह छात्र राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का दावा है कि दृष्टिहीन छात्रों की किताबों की कीमत सामान्य छात्रों की किताबों की कीमत से बहुत ज्यादा है। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को किताब खरीदने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
किताबों के दाम को लेकर ही छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि सरकार उनकी बात जल्द से जल्द सुने और किताबों की कीमत कम की जाए। जानकारी के लिए बता दें, राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान देहरादून में दिव्यांग बच्चों की सहायता करता है, जो खास तौर पर दिव्यांग छात्रों को शिक्षा और प्रशिक्षण में मदद करता है।
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किताबों को लेकर छात्रों की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्र अपने शिक्षा के अधिकार के लिए मांग कर रहे हैं। छात्रों ने मांग की है कि उन्हें शिक्षा के लिए किताबों के दाम कम किए जाएं। छात्रों का मानना है कि किताबें सिर्फ पढ़ाई का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने का एक सटीक साधन हैं। महंगी किताबें उनके जीवन और करियर में बड़ी बाधा बनती जा रही हैं। दिव्यांग छात्रों ने सरकार को साफ तौर पर संदेश दे दिया है कि सरकार उनकी मांग को जल्द से जल्द मान ले, वरना वह छात्र भूख हड़ताल पर उतर जाएंगे।
क्या है छात्रों के आरोप?
देहरादून के राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में छात्रों ने 7 अगस्त को आरोप लगाया था कि संस्थान में लंबे समय से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं हुई है। साथ ही छात्रों ने दावा किया कि बच्चों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि हॉस्टल में मिलने वाले भोजन की क्वालिटी बेहद खराब हो रही है। इन्हीं समस्याओं को लेकर छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से संस्थान के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, ताकि उनकी मांगों को पूरा किया जाए।
