उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में तैयार किया गया नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी का नया पुल एक बार फिर चर्चा में है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल से स्थानीय लोगों को उम्मीदें थीं और लंबे इंतजार के बाद करीब 17 दिन पहले इस पुल को ट्रैफिक की आवाजाही के लिए खोल दिया गया था, लेकिन बारिश ने पुल के साथ-साथ लोगों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया। भारी बारिश के बाद पुल के एक छोर पर बने एप्रोच रोड में बड़ा धंसाव हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने तत्काल इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही रोक दी।
सोमवार सुबह स्थानीय लोगों ने पुल के पास सड़क धंसने की सूचना प्रशासन को दी। इसके बाद पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती तस्वीरों में पुल के ऊपर बड़ा गड्ढा दिखाई देने के कारण लोगों ने पुल के धंसने की आशंका जताई। हालांकि, बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि मुख्य पुल सुरक्षित है, जबकि भारी बारिश के कारण पुल से जुड़ी एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बह जाने से सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है।
यह भी पढ़ें: फॉलोअर्स बढ़ाने को तीन बहनों ने रची फर्जी शादी की कहानी, वायरल हुआ किस्सा
पुलिस ने क्या कहा?
प्रेमनगर कोतवाली पुलिस के अनुसार, 28 जुलाई की सुबह नंदा की चौकी के पास पुलिया क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। निरीक्षण में पाया गया कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन लगातार बारिश के कारण एप्रोच रोड के नीचे से मिट्टी बह गई, जिससे सड़क धंस गई। संबंधित निर्माण एजेंसी मरम्मत का काम शुरू कर चुकी है और मार्ग को जल्द यातायात के लिए बहाल करने की कोशिश की जा रही है।
16 दिन ही चला
यह पुल देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर टौंस नदी के ऊपर बनाया गया है। पिछले साल मॉनसून में पुराना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद लोक निर्माण विभाग ने करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से इसका पुनर्निर्माण कराया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 12 जुलाई से इस पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू की गई थी। लेकिन पहली ही बड़ी बारिश के बाद एप्रोच रोड में धंसाव होने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले अस्थायी पुलिया भी बह गई थी
इससे पहले 11 जुलाई की रात टौंस नदी में तेज बहाव के कारण ह्यूम पाइप डालकर बनाई गई अस्थायी पुलिया बह गई थी। इससे देहरादून और विकासनगर के बीच संपर्क प्रभावित हो गया था। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने तेजी से काम करते हुए मुख्य पुल को तैयार किया और अगले ही दिन यानी 12 जुलाई से उस पर यातायात शुरू करा दिया। अब उसी पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है।
ट्रैफिक पूरी तरह रोका गया
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही रोक दी। मौके पर बैरिकेडिंग कर पुलिस तैनात की गई है, ताकि कोई वाहन क्षतिग्रस्त हिस्से की ओर न जा सके। इसके साथ ही दसरे रास्तों पर ट्रैफिक चलाया जा रहा है जिसके कारण लोगों का एक्स्ट्रा दूरी तय करनी पड़ रही है।
यह भी पढ़ें: पहले चिराग और नीतीश, अब आठवले की एंट्री, यूपी में बढ़ी BJP की टेंशन
लोगों में गुस्सा
लगातार दूसरी बार इसी स्थान पर सड़क और पुल के प्रभावित होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार किए गए पुल से लंबे समय तक सुरक्षित यातायात की उम्मीद थी, लेकिन पहली ही मॉनसूनी बारिश में एप्रोच रोड धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। कई लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
घटना के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। फिलहाल क्षतिग्रस्त एप्रोच रोड की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धंसाव की वास्तविक वजह क्या रही और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, करोड़ों खर्च करने के बाद भी इस तरह की घटना से यह मामला अब सुर्खियों में है।
