राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में 'राष्ट्रीय युवा धर्म संसद' का शुभारंभ किया। सम्मेलन में लगभग 1700 जेन-जी पहुंचे। मोहन भागवत ने युवाओं को धर्म का अर्थ समझाया और यह बताया कि धर्म कोई बुढ़ापे की चीज नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि धर्म रिलीजन नहीं है। रिलीजन से धर्म ऊपर है। यह सृष्टि के अस्तित्व से है और अंत तक रहेगा।
सोशल मीडिया पर इसी कार्यक्रम के वीडियो का एक छोटा सा हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि जिसका उदय हुआ। उसका अस्त भी निश्चित है। सोशल मीडिया पर इसे नरेंद्र मोदी सरकार पर संघ प्रमुख के निशाने के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है।
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मगर वीडियो देखने पर पता चलता है कि सोशल मीडिया पर संदर्भ छिपाकर वीडियो फैलाया जा रहा है। मोहन भागवत का यह बयान सरकार नहीं, बल्कि धर्म के संदर्भ में सूर्य का उदाहरण देते हुए दिया गया। जिसमें भागवत यह बताने का प्रयास कर रहे हैं कि सूर्य का उदय और अस्त निश्चित है। भले आप इसे माने या न माने।
'धर्म के मुताबिक सबकुछ चलता है'
अपने संवाद में मोहन भागवत ने कहा, 'जब मैंने युवा धर्म संसद के बारे में सुना तो यह सोचकर अच्छा लगा, क्योंकि धर्म का विचार युवा करते हैं... यह बात सुनाई नहीं देती है। धर्म की बात करने पर लोग कहते हैं कि यह बुढ़ापे की बात है। भगवद् गीता और रामायण रिटायर्ड होने के बाद पढ़ने के ग्रंथ है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह जो धर्म है... वह अस्तित्व के प्रारंभ से अस्तित्व के अंत तक कम से कम रहता ही है। उसी के अनुसार सारी बातें चलती हैं। आप उसे मानो या न मानो।'
इसी बात को आगे बढ़ाते हुए भागवत ने कहा, 'दुनिया में ऐसी बाते हैं। अब सूर्य है। उसका आप कुछ नहीं कर सकते। हम नहीं मानते, मत मानो। उसका उदय और अस्त निश्चित है। मनुष्य अहंकार में... सब ओर मेरी सत्ता चलती है, ऐसा मानकर जो करता है, उसके चलते ऐसी बातों का भी कि ये अपनी इच्छा से चलता है... ऐसी गलतफहमी उसके मन में होती है। लेकिन ऐसा नहीं है।'
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भागवत ने कहा कि अगर धर्म को समझना है तो हम लोगों को मन में पहले से बैठी कुछ चीजों से मुक्त होना पड़ेगा। धर्म बुढ़ापे की चीज नहीं है। सृष्टि के आरंभ से धर्म है और विलय तक निश्चित चलेगा। सबकुछ उसी से चलता है। मेरे लिए मेरा धर्म मेरे जन्म से निश्चित है और मेरी मृत्यु तक रहेगा। भागवत ने धर्म को सभी सुखों का कारण बताया।
रिलीजन धर्म नहीं है: भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि लोगों को धर्म शब्द का अर्थ नहीं पता। उसके पीछे की वजह यह है कि हम अपनी भाषा भूल गए। पाश्चात्य लोगों ने हमारे देश में धर्म का आचरण करते लोगों को देखा। उनको समझ में नहीं आया कि यह क्या चीज है। धर्म का आचरण करते समय कुछ प्रैक्टिस करनी पड़ती है।
संघ प्रमुख ने उदाहरण दिया कि अगर आपको कुश्ती जितनी है तो अखाड़े में जाकर जोर बैठक लगानी पड़ती है। जोर बैठक कुश्ती नहीं है। लेकिन कुश्ती खेलनी है तो उससे जाना पड़ता है। वैसे ही धर्म का एक कर्मकांड होता है। उसमें से जाना ही पड़ता है। एक अनुशासन है, जो हमको वहां तक पहुंचाता है। वह भी धर्म का एक छोटा अंग होता है। वही सबकुछ नहीं है। इसे देखकर पाश्चात्य को लगा कि यह हमारे यहां का रिलीजन जैसा है। उन्होंने धर्म को रिलीजन बना दिया और हम भी धर्म को रिलीजन कहने लगे। संघ प्रमुख ने कहा कि रिलीजन धर्म नहीं है। धर्म रिलीजन से ऊपर है।
