उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष के बीच मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर विभागीय कार्यप्रणाली, बिजली बिलों में अतिरिक्त भार और प्रशासनिक समन्वय की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र सामने आने के बाद बिजली विभाग और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में कहा कि विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों और गतिविधियों की जानकारी उन्हें अधिकारियों के बजाय मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से मिल रही है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सरकार को पहले विश्वास में लिया जाना चाहिए। साथ ही, मंत्री ने जून 2026 के बिजली बिलों में फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) लागू किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस फैसले की जानकारी उन्हें पहले नहीं दी गई, जबकि इसका सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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संविदा कर्मियों के मुद्दे पर मांगी रिपोर्ट
पत्र में संविदा कर्मियों को हटाए जाने की शिकायतों का भी जिक्र किया गया है। ऊर्जा मंत्री ने विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि कर्मचारियों को किन परिस्थितियों में और किस आधार पर हटाया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और समीक्षा के निर्देश दिए हैं।
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ऊर्जा मंत्री और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के बीच सामने आए इस पत्राचार ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। इसे सरकार और बिजली विभाग के शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेद के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विभाग मंत्री द्वारा उठाए गए सवालों का क्या जवाब देता है और सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
ऊर्जा मंत्री के इस पत्र ने साफ कर दिया है कि बिजली विभाग की कार्यशैली को लेकर सरकार के भीतर ही असंतोष है और आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।
