लखनऊ। एक जगह जन्म, दूसरी जगह करीब 12 साल की साधना, तीसरी जगह हनुमान मंदिर और उससे जुड़ी पुल निर्माण की कहानी, जबकि चौथी जगह महासमाधि। बाबा नीम करौली की कहानी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, लखनऊ और वृंदावन से इस तरह जुड़ी है कि अब सरकार इन चारों पड़ावों को एक आध्यात्मिक सर्किट में जोड़ रही है। महासमाधि दिवस पर यूपी पर्यटन विभाग ने बाबा से जुड़े पांच विशेष टूर पैकेज भी शुरू किए हैं। फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद में पर्यटन सुविधाओं के विकास पर करीब 12.93 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह सिर्फ मंदिरों को जोड़ने की योजना नहीं है। सरकार बाबा के जीवन के चार बड़े अध्याय जन्म, तपस्या, हनुमान भक्ति और महासमाधि को एक ही यात्रा में सामने लाने की तैयारी कर रही है।
फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव को बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली माना जाता है। उनका पैतृक घर भी इसी क्षेत्र से जुड़ा है। यूपी पर्यटन विभाग ने अकबरपुर को बाबा की जन्मस्थली के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया है। पहले चरण में 8.65 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि 2.22 करोड़ रुपये की दूसरे चरण की परियोजना पर काम चल रहा है। इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बाबा की सांसारिक यात्रा शुरू
इसके अलावा 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी प्रस्तावित है। यही वह पहला पड़ाव है जहां से बाबा की सांसारिक यात्रा शुरू हुई। आगे चलकर उन्होंने गृहस्थ जीवन से अलग साधना का रास्ता अपनाया और हनुमान भक्ति उनकी पहचान बनती गई। अकबरपुर में अब सरकार की कोशिश बाबा के पैतृक और जन्मस्थली से जुड़े स्थानों को ऐसी सुविधाओं से जोड़ने की है, ताकि यहां आने वाला श्रद्धालु सिर्फ दर्शन न करे, बल्कि बाबा के शुरुआती जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत को भी समझ सके।
तपस्या और यहीं से ‘नीम करौली’ की पहचान
बाबा की कहानी का सबसे मजबूत अध्याय फर्रुखाबाद के संकिसा के पास स्थित नीम करौली धाम से जुड़ता है। जिला प्रशासन के अनुसार यह बाबा की तपस्थली है। यहां प्राचीन हनुमान मंदिर और पवित्र गुफा उनकी साधना से जुड़े प्रमुख स्थल हैं। बाबा ने इसी आश्रम में भूमिगत गुफा में करीब 12 वर्ष साधना की थी। यही कारण है कि फर्रुखाबाद को बाबा की आध्यात्मिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। आज भी यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मनोकामना पूरी होने पर हनुमान जी को घंटा चढ़ाने की परंपरा है और सुबह-शाम आरती होती है। जिला प्रशासन भी नीम करौरी धाम को बाबा की साधना, गुफा और हनुमान मंदिर से जोड़कर दर्ज करता है।
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ट्रेन से उतारे गए बाबा, फिर नहीं चली ट्रेन
फर्रुखाबाद से बाबा की एक बेहद चर्चित कथा भी जुड़ी है। भक्तों और स्थानीय परंपरा में कहा जाता है कि बाबा को एक बार ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करने के आरोप में नीम करौली स्टेशन के पास ट्रेन से उतार दिया गया। बाबा नीचे उतरकर वहीं बैठ गए। इसके बाद ट्रेन को चलाने की कोशिश हुई, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ी। कथा के अनुसार रेलवे कर्मचारियों ने बाबा से ट्रेन में दोबारा बैठने का आग्रह किया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना को बाबा की सिद्धि या लीला के रूप में भक्त आज भी याद करते हैं।
हनुमान सेतु और पुल की वह कहानी
बाबा की कहानी का अगला बड़ा पड़ाव है लखनऊ का हनुमान सेतु। यही वह जगह है जहां बाबा की हनुमान भक्ति से जुड़ी सबसे चर्चित स्थानीय परंपराओं में से एक सामने आती है।
प्रचलित कथा के अनुसार गोमती नदी पर पुल निर्माण का काम बार-बार अटक रहा था। पिलर टिक नहीं पा रहे थे और निर्माण में लगातार दिक्कत आ रही थी। इसी दौरान बाबा की ओर से हनुमान मंदिर निर्माण की बात सामने आई। मान्यता है कि मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही पुल निर्माण का रास्ता भी साफ हुआ। आज हनुमान सेतु मंदिर लखनऊ की प्रमुख धार्मिक पहचान है और बाबा नीम करौली की हनुमान भक्ति की विरासत से इसका संबंध बताया जाता है।
1973 में महासमाधि लेकर पूरी हुई जीवन यात्रा
सर्किट का अंतिम पड़ाव है वृंदावन। वर्ष 1973 में बाबा ने यहीं महासमाधि ली। उनका समाधि मंदिर आज भी बाबा के अनुयायियों के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र है। इस तरह वृंदावन बाबा की कहानी का अंत नहीं, बल्कि उनकी आध्यात्मिक विरासत का अगला अध्याय बन जाता है। जन्मस्थली अकबरपुर से शुरू हुई यात्रा फर्रुखाबाद की साधना और लखनऊ की हनुमान भक्ति से गुजरते हुए वृंदावन की महासमाधि तक पहुंचती है।
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सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
यूपी सरकार अब बाबा से जुड़े इन स्थानों को अलग-अलग धार्मिक स्थलों के बजाय एक संगठित आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही है।अकबरपुर में जन्मस्थली का विकास, फर्रुखाबाद में आश्रम और पर्यटक सुविधाएं, बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित आधुनिक प्रदर्शनी हॉल, सांस्कृतिक ब्लॉक, डाइनिंग हॉल, कैफेटेरिया, रसोई, शौचालय और करीब 60 लोगों के ठहरने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
फर्रुखाबाद में करीब 1.51 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी हो चुकी है। यूपीएसटीडीसी ने बाबा के नाम से विशेष टूर पैकेज भी शुरू किया है। एक आधिकारिक पैकेज में लखनऊ-फर्रुखाबाद-मैनपुरी-सिरसागंज-फिरोजाबाद-आगरा-मथुरा-वृंदावन-लखनऊ का पांच दिन और चार रात का मार्ग दिया गया है।
