उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। जुलाई के पहले हफ्ते में प्रदेश की नई बिजली दरों (टैरिफ) का एलान हो सकता है। संकेत हैं कि इस बार बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं होगी बल्कि उपभोक्ताओं को कई बड़ी राहतें मिल सकती हैं। स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं से वसूलने के प्रस्ताव को खारिज किया जा सकता है, वहीं ईंधन अधिभार (FPPCA) की गणना का तरीका भी बदलेगा, जिससे आने वाले महीनों में बिजली बिल कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही 1912 हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सख्त व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है।
उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग सभी बिजली कंपनियों की जनसुनवाई पूरी कर चुका है। राज्य सलाहकार समिति की बैठक के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में नई बिजली दरों की घोषणा होने की संभावना है। पावर कॉरपोरेशन ने करीब 16,448 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का हवाला देते हुए दरें बढ़ाने की मांग की है, लेकिन आयोग के स्तर पर बिजली दरें नहीं बढ़ाने और उपभोक्ताओं को राहत देने पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर लगाने की लागत को टैरिफ में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है लेकिन नियामक आयोग इस मांग को खारिज कर सकता है। साथ ही स्मार्ट मीटर की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की जा सकती है।
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अधिभार की गणना बदलेगी, बिल होगा कम
जुलाई से ईंधन अधिभार (एफपीपीसीए) की गणना नए मानकों के आधार पर होगी। आयोग ने पिछले 14 महीनों से अपनाई जा रही गणना प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता परिषद का दावा है कि गलत गणना से करीब 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई, जिसकी वापसी की मांग भी आयोग से की गई है। नए टैरिफ में घर से व्यवसाय करने वाले उपभोक्ताओं और बहुमंजिला इमारतों में बिजली कनेक्शन के नियमों को आसान बनाने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे हजारों उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिल सकता है।
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उपभोक्ताओं की शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के लिए 1912 हेल्पलाइन की जवाबदेही तय की जाएगी। शिकायतों में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया जा सकता है।


