उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की गौतमबुद्धनगर यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होना भारी पड़ गया है। ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने अक्षत को शांति भंग से जुड़े प्रावधानों के तहत 5 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया है। अक्षत स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश राज्य समिति के सदस्य भी हैं। वहीं CJP के सौरव दास भी इस कार्रवाई से नाराज दिखे।
अक्षत को 4 सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया। यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अक्षत ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया और उन्हें प्रदर्शन के लिए जुटाने का प्रयास किया।
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अक्षत ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने नोटिस में लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। अक्षत ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के समय यूनिवर्सिटी में क्लास नहीं चल रही थीं और संस्थान करीब तीन महीने से बंदा था।
सौरव दास का पूरा बयान
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करके इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लिखा, 'क्या गौतम बुद्ध नगर के DM ने सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का ऐतिहासिक आदेश नहीं पढ़ा है? CJP के प्रदर्शनों में शामिल होने वाले सभी प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से स्थायी छूट मिली हुई है। इसलिए अक्षय त्रिपाठी को 5 लाख रुपये का जमानती बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है। हमने केंद्र सरकार से तुरंत इस मामले में कार्रवाई करने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले की एक कॉपी संबंधित DM को भेजने को कहा है। हम किसी भी छात्र को निशाना नहीं बनने देंगे।'
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SFI ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
अक्षत के खिलाफ कार्रवाई के बाद SFI ने इसका विरोध किया है। संगठन ने इसे छात्रों को डराने और उनके प्रदर्शन के अधिकार को दबाने की कोशिश बताया। SFI का दावा है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल लोगों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अक्षत के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
SFI ने कहा कि अक्षत के खिलाफ नोटिस ऐसे समय में जारी किया गया है जब संगठन के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले में जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई थी। संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर अदालत के आदेश की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस कानून-व्यवस्था से जुड़ी कार्रवाई के जरिए छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। SFI ने अक्षत के खिलाफ जारी नोटिस को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
