उत्तर प्रदेश में वाहन मालिकों के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) की पुरानी व्यवस्था जल्द बदलने जा रही है। अब वाहनों के लिए कागजी RC की जगह ड्राइविंग लाइसेंस की तर्ज पर स्मार्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराया जाएगा। परिवहन विभाग ने इसके लिए 274.55 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। 5 वर्ष के अनुबंध वाले इस टेंडर के तहत कंपनी का चयन जल्द होने की उम्मीद है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा तो अक्टूबर से वाहन मालिकों को स्मार्ट कार्ड आरसी मिलनी शुरू हो सकती है।
परिवहन विभाग ने स्मार्ट आरसी व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पहले ही शुरू कर दी थी। जून में स्मार्ट आरसी का ट्रायल सफल रहा। इसके बाद विभाग की ओर से 24 अगस्त को 274.55 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया। 5 वर्ष के अनुबंध के लिए कंपनी का चयन जल्द किए जाने की उम्मीद है।
कंपनी फाइनल होने के बाद अक्टूबर से नई व्यवस्था शुरू किए जाने की तैयारी है। परिवहन विभाग का कहना है कि विभाग लगातार डिजिटलीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्मार्ट आरसी भी स्मार्ट डीएल की तर्ज पर उपलब्ध कराई जाएगी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक, इसके लिए टेंडर हो चुका है और जल्द ही कंपनी को अंतिम रूप दिया जाएगा।
DL के बराबर होगा स्मार्ट कार्ड
नई स्मार्ट RC का आकार ड्राइविंग लाइसेंस के बराबर होगा। इसमें वाहन और उसके मालिक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज रहेंगी। स्मार्ट कार्ड में माइक्रोप्रोसेसर और क्यूआर कोड जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे वाहन की जानकारी को सुरक्षित तरीके से रखा जा सकेगा। मौजूदा कागजी आरसी की कॉपी आसानी से की जा सकती है, जबकि स्मार्ट कार्ड आरसी को सुरक्षा की दृष्टि से अधिक मजबूत बनाया जाएगा। क्यूआर कोड और अन्य सुरक्षा सुविधाओं की मदद से वाहन तथा उसके स्वामी से जुड़ी जानकारियों का सत्यापन भी आसान होगा।
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पुरानी कागज की RC वालों को भी मिलेगा स्मार्ट कार्ड
नई व्यवस्था केवल नए वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी। जिन वाहन मालिकों के पास पहले से पुरानी कागज वाली आरसी है, वे भी निर्धारित फीस जमा करके स्मार्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बनवा सकेंगे। इसके लिए वाहन मालिक को संबंधित परिवहन कार्यालय में जाकर अपनी पुरानी कागजी आरसी जमा करनी होगी। विभागीय प्रक्रिया और सत्यापन पूरा होने के बाद उनकी आरसी को स्मार्ट कार्ड के रूप में उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे पुराने वाहन मालिकों को भी अपनी कागजी आरसी को स्मार्ट आरसी में बदलने का विकल्प मिलेगा और धीरे-धीरे कागजी आरसी पर निर्भरता कम की जा सकेगी।
डीलर नहीं जारी करेंगे आरसी नंबर
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन डीलरों की भूमिका में भी बदलाव होगा। डीलर आरसी नंबर जारी नहीं करेंगे, बल्कि वाहन मालिक को आरसी नंबर उपलब्ध कराया जाएगा। डीलर रजिस्ट्रेशन से जुड़ी पत्रावलियां अपने पास नहीं रखेंगे। स्मार्ट कार्ड आरसी को एआरटीओ कार्यालय से स्मार्ट कार्ड के रूप में तैयार कर डाक विभाग के माध्यम से वाहन स्वामी के पते पर भेजे जाने की व्यवस्था होगी। इससे वाहन मालिक को आरसी प्राप्त करने की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिलने की उम्मीद है।
कंपनी के चयन के लिए रखी गईं कई शर्तें
स्मार्ट आरसी के टेंडर में कंपनी चयन को लेकर भी कई शर्तें रखी गई हैं। बोली लगाने वाली कंपनी का पिछले तीन वर्षों का न्यूनतम औसत वार्षिक टर्नओवर 109.82 करोड़ रुपये होना जरूरी किया गया है। कंपनी को 2.74 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। टेंडर की शर्तों और तकनीकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल कंपनी को काम सौंपा जाएगा। इसके बाद स्मार्ट कार्ड आरसी तैयार करने और वाहन मालिकों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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आरसी व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव
स्मार्ट आरसी लागू होने के बाद वाहन मालिकों को कागज की आरसी संभालकर रखने की परेशानी से काफी हद तक राहत मिल सकती है। स्मार्ट कार्ड में वाहन और उसके स्वामी से जुड़ी जानकारियां रहेंगी और सुरक्षा के लिए माइक्रोप्रोसेसर और क्यूआर कोड जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। परिवहन विभाग की यह पहल वाहन पंजीयन व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अगर अक्टूबर से प्रस्तावित व्यवस्था लागू हो जाती है, तो नए वाहनों के साथ-साथ पुरानी कागजी आरसी रखने वाले वाहन मालिकों के लिए भी स्मार्ट आरसी का रास्ता खुल जाएगा।
