बिहार के कटिहार जिले में पुलिस की वर्दी पहनकर कानून का पालन कराने वाले दो दारोगाओं पर गंभीर आरोप लगे। आरोपो के मुताबिक एक पर तस्कर से बरामद नकदी को दबाने और कानूनी प्रक्रिया में हेराफेरी का आरोप साबित हुआ, तो दूसरे पर वारंटी और कथित भू-माफिया से सांठगांठ आरोप सही पाए गए। नतीजा यह हुआ कि एक दारोगा की नौकरी चली गई, जबकि दूसरे की सलाहा वेतन बढ़ोतरी पर रोक दी गई। इस मामले पर पूर्णिया क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद ने दोनों मामलों में सख्त कार्रवाई कि है जिसने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार पर अब किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

 

इस मामले पर सबसे बड़ी कार्यवाई कटिहार में तैनात दारोगा पवन कुमार चौधरी के खिलाफ हुई है। विभागीय जांच में उन पर लगे आरोप सही पाए जाने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया । मामला साल 2024 का है, जब पवन कुमार चौधरी पूर्णिया जिले के धमदाहा थाना में अपर थानाध्यक्ष के पद पर तैनात थे। गुप्त सूचना के आधार पर उन्होंने स्मैक तस्करी से जुड़े एक ठिकाने पर छापेमारी की थी। कार्रवाई में आरोपी की गिरफ्तारी हुई और घर से नकदी भी बरामद की गई।

 

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आरोप है कि बरामद रकम को न तो जब्ती सूची में दर्ज किया गया और न ही सरकारी खजाने में जमा कराया गया। इतना ही नहीं, छापेमारी के चार दिन बाद प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसे विभागीय जांच में गंभीर प्रक्रियागत उल्लंघन माना गया। तस्कर के परिजनों द्वारा की गई शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में पूरे मामले की परतें खुलीं थी जिसके बाद आरोप प्रमाणित होने पर आईजी ने दारोगा को सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

 

भू-माफिया कनेक्शन और लापरवाही ने बढ़ाई मुश्किल

 

दूसरे मामले में कटिहार में मुफस्सिल थाना के शशिरंजन विभागीय कार्रवाई की जद में आए। जांच में उनके एक वारंटी और कथित भू-माफिया से संदिग्ध संबंध सामने आए। इसके अलावा, एक आपराधिक मामले में मामला दर्ज होने के बावजूद उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए समय पर कार्रवाई नहीं की थी। इन्हीं सबूतो के आधार पर आईजी ने उनकी एक सालाहना वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया। विभागीय नियमों के अनुसार यह दंड दो ब्लैकमार्क के बराबर माना जाएगा।

 

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पुलिस महकमे में साफ संदेश

 

 दो पुलिस अधिकारियों पर हुई कड़ी कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दो दारोगाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए चेतावनी है जो वर्दी की आड़ में नियमों से समझौता करने की कोशिश करते हैं। आईजी विवेकानंद के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार अब सीधे कार्रवाई होगी, चाहे आरोपी किसी भी पद पर क्यों न हो।