बिहार की राजनीति में एक कथित वायरल ऑडियो ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। बिजली विभाग के कनीय अभियंता और कुर्था के जदयू विधायक के बीच शुरू हुआ विवाद अब थाने और सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित ऑडियो में विधायक द्वारा अभियंता को फटकार लगाने और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है। ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब पुलिस जांच के केंद्र में है।
ट्रांसफार्मर विवाद से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, रामलगन बीघा गांव में खराब पड़े ट्रांसफार्मर को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। इसी मुद्दे को लेकर कुर्था विधायक पप्पू कुमार वर्मा और अरवल विद्युत आपूर्ति प्रमंडल में कार्यरत कनीय विद्युत अभियंता नीतीश कुमार के बीच बातचीत हुई। आरोप है कि इसी दौरान फोन पर तीखी बहस हुई, जिसका एक कथित ऑडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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ऑडियो में एक व्यक्ति को अभियंता पर नाराजगी जताते हुए अपमानजनक भाषा और धमकी भरे शब्द बोलते सुना जा सकता है। हालांकि, ऑडियो की सत्यता की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इंजीनियर का गंभीर आरोप, धक्का-मुक्की और धमकी दी गई
कनीय अभियंता नीतीश कुमार ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए अरवल सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। अभियंता का कहना है कि पहले फोन पर उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और बाद में उन्हें सर्किट हाउस बुलाकर कथित रूप से धक्का-मुक्की, मारपीट तथा धमकी दी गई। शिकायत में कहा गया है कि उन्हें सरकारी कार्य करने से रोकने, नौकरी नहीं करने देने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई। अभियंता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सदर थाना में नामजद एफआईआर, पुलिस जांच शुरू
अभियंता के आवेदन के आधार पर अरवल सदर थाना में विधायक पप्पू कुमार वर्मा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब वायरल ऑडियो, कॉल रिकॉर्ड, दोनों पक्षों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वायरल ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज किसकी है और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
विधायक का पलटवार, छवि खराब करने की साजिश
दूसरी ओर विधायक पप्पू कुमार वर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि क्षेत्र की जनता की समस्या को लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारी से बातचीत की थी, लेकिन उनके खिलाफ झूठा माहौल बनाया जा रहा है।
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विधायक ने दावा किया कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने और उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से यह पूरा विवाद खड़ा किया गया है। उन्होंने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आने पर सभी आरोप स्वतः बेनकाब हो जाएंगे।
ऑडियो, आरोप और राजनीति अब जांच पर टिकी निगाहें
एक ओर सरकारी अधिकारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप हैं तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि का स्पष्ट खंडन। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई अब पुलिस जांच और तकनीकी साक्ष्यों पर निर्भर है। वायरल ऑडियो की प्रमाणिकता, कथित घटनाक्रम और दोनों पक्षों के दावों की पड़ताल के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
