उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर के संभागीय परिवहन कार्यालय में अनियमितता, अवैध वसूली और कार्यालय में अनधिकृत लोगों के सक्रिय होने की शिकायतों पर हुई छापेमारी के बाद शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। परिवहन मंत्री के निर्देश पर कानपुर के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों सोमलता यादव और आलोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं आरटीओ प्रशासन राकेन्द्र सिंह से 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
कानपुर में शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने आरटीओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। टीम ने कार्यालय में मौजूद करीब 50 लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान 11 संदिग्ध लोग ऐसे मिले, जो वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर आवेदकों से धोखाधड़ी कर कथित तौर पर अवैध वसूली कर रहे थे।
आरोपियों के पास से 43,485 रुपये नकद बरामद किए गए। इस कार्रवाई के दौरान कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वार बंद कर जांच की गई थी। क्राइम ब्रांच और पुलिस की टीम ने अलग-अलग कक्षों में जाकर दस्तावेजों और कामकाज की पड़ताल की। छापे के दौरान संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई थी।
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2 लिपिकों की भूमिका भी संदिग्ध
जांच में आरटीओ कार्यालय के दो लिपिक मधुर मिश्रा और विपिन कुमार की भूमिका भी सामने आई। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ खुली सतर्कता जांच कराई जा रही है। जांच में चालान की रसीद में दर्ज रकम और वास्तविक लेनदेन में अंतर भी पाया गया है। एक मामले में यूपी 91 एटी 4251 नंबर के ट्रक के चालक ने आरोप लगाया कि कार्यालय के एक कर्मचारी ने उससे 26,750 रुपये लिए, लेकिन उसे केवल 21,750 रुपये की जमा पर्ची दी गई। जांच में इस तरह की वित्तीय अनियमितता भी सामने आई।
15 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
प्रशासनिक जांच के बाद मामले को सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया। दोनों लिपिकों समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ कानपुर के काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। अब पुलिस मुकदमे के आधार पर मामले की आगे जांच कर रही है। शासन ने प्रथम दृष्टया माना कि कार्यालय में कर्मचारियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं रखी गई और अधीनस्थों पर नियंत्रण में लापरवाही बरती गई।
इसी आधार पर ARTO प्रशासन आलोक कुमार और एआरटीओ प्रवर्तन तृतीय दल सोमलता यादव को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में दोनों को परिवहन मुख्यालय से संबद्ध किया गया है और मामले की जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त, वाराणसी परिक्षेत्र को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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बड़ी कार्रवाई के बाद अब सवाल
कानपुर आरटीओ में छापे से लेकर एफआईआर और अब दो एआरटीओ के निलंबन तक हुई कार्रवाई ने परिवहन कार्यालयों में सक्रिय कथित दलाली और अवैध वसूली के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवहन विभाग ने साफ किया है कि सरकारी सेवाओं के नाम पर लोगों से अवैध वसूली या किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
