कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में मंत्री बी नागेंद्र ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में आरोप लग रहे थे। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने लगातार उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। बी नागेंद्र ने आज मंत्री पद से इस्तीफे के साथ-साथ विधायक पद से भी इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। उन्होंने इस घोषणा के दौरान अपना पक्ष रखा और वह भावुक नजर आए।
दरअसल, वाल्मीकि निगम में करीब 89.63 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। आरोप है कि निगम के बैंक खातों से फर्जी दस्तावेजों, चेक और आरटीजीएस ट्रांजैक्शन के जरिए बड़ी रकम दूसरी जगह भेजी गई। यह निगम अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण और विकास से जुड़े कामों के लिए बनाया गया है। मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी समेत अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं।
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पूरा विवाद समझिए
यह मामला मई 2024 में उस समय सामने आया था, जब निगम के अकाउंट्स ऑफिसर पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उनके पीछे छोड़े गए नोट में कथित तौर पर निगम के पैसों के गलत तरीके से ट्रांसफर किए जाने और अधिकारियों पर दबाव का जिक्र था। इसके बाद बैंक खातों की जांच शुरू हुई और कई ट्रांजैक्शन सामने आए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, निगम के पैसे को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और बाद में कुछ रकम को कैश और दूसरी संपत्तियों में बदले जाने के आरोप लगे।
बी नागेंद्र का नाम कैसे जुड़ा?
बी नागेंद्र उस समय कर्नाटक सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री थे। घोटाले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें फिर से कर्नाटक कैबिनेट में शामिल कर लिया गया। इस बार वह योजना और सांख्यिकी मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे। उनकी दोबारा कैबिनेट में वापसी के बाद वाल्मीकि निगम मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए और लगातार नागेंद्र को हटाने की मांग की।
बीजेपी ने बनाया दबाव
इस मामले को लेकर बीजेपी ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किए और लगातार मुख्यमंत्री डीके शिवेकुमार पर दबाव बनाया। बीजेपी नेताओं ने विधानसभा तक मार्च निकालकर बी नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। पिछले कुछ दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में काफी बड़ा बन गया था।
बी नागेंद्र की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने जून 2026 में दाखिल अपनी चार्जशीट में बी नागेंद्र समेत कई लोगों के नाम शामिल किए। जांच एजेंसी ने कथित तौर पर 89.63 करोड़ रुपये की रकम को फर्जी दस्तावेजों और बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए दूसरी जगह भेजे जाने की बात कही है।
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दो में क्या बदला?
इस मामले में एक और बड़ी बात यह है कि नागेंद्र ने पहले अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर खुद को निर्दोष बताया था। 26 अगस्त को भी उनके इस्तीफे की खबरें सामने आई थीं, लेकिन उस समय नागेंद्र ने इन्हें गलत बताया था। उनके कार्यालय की ओर से कहा गया था कि इस्तीफे को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई बातचीत नहीं हुई है। इसके बाद अब 28 अगस्त को उन्होंने खुद मंत्री और विधायक पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस्तीफा देने के दौरान नागेंद्र ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
