हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल कसोल में जंगल की जमीन पर कचरा जमा होने का मामला सामने आया था। सोशल मीडिया पर जून 2025 में कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाने वाले वीडियो वायरल हुए थे। इसके बाद राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने इस मामले पर खुद संज्ञान लिया था।
अब कुल्लू प्रशासन ने NGT को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट सौंप दी है। प्रशासन के अनुसार जिस जगह पर कचरा जमा था उसे पूरी तरह साफ कर दिया गया है। यहां से अब तक करीब 90.5 टन कचरा हटाया जा चुका है।
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जंगल की जमीन पर क्यों रखा गया था कचरा?
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार मनाली के पास रंगरी में मौजूद ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र ने जब कचरा लेना बंद कर दिया था। तब वन विभाग ने अस्थायी तौर पर कचरा रखने और उसे अलग करने के लिए इस जगह की पहचान की थी। जुलाई 2024 में मणिकरण विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) की बैठक में जंगल की जमीन पर कचरा रखने का फैसला लिया गया था। इसके बाद यहां कचरा जमा होने लगा और धीरे-धीरे इसके बड़े ढेर दिखाई देने लगे।
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NGT ने लिया था मामले का संज्ञान
जून 2025 में जंगल की जमीन पर कचरे के ढेर के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई। वीडियो में बड़ी मात्रा में कचरा दिखाई दे रहा था। मामला सामने आने के बाद NGT ने संज्ञान लेते हुए प्रशासन से इस संबंध में कार्रवाई की जानकारी मांगी। प्रशासन ने बताया कि अप्रैल 2026 में मणिकरण विशेष क्षेत्र के लिए कचरा प्रबंधन की नई व्यवस्था लागू की गई। इसके लिए एक NGO, ग्रामीण विकास विभाग और SADA मणिकरण के बीच समझौता हुआ।
इसके बाद NGO ने मई 2026 से कचरा इकट्ठा करने और उसके प्रबंधन का काम शुरू किया। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक 13 जुलाई तक 90.5 टन कचरा एकत्र किया जा चुका था और संबंधित जंगल की जमीन को पूरी तरह साफ कर दिया गया है।
