केरल की एक अदालत ने 2012 में हुई गर्भवती महिला कर्मचारी की हत्या के मामले में 63 वर्षीय व्यक्ति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराया और उसे महिला की हत्या के लिए सजा दी। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी के महिला के साथ प्रेम संबंध थे और वह इस रिश्ते को छिपाना चाहता था। इसी वजह से उसने महिला की हत्या कर दी थी। करीब 14 साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद पीड़िता के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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केरल में 2012 में आठ महीने की गर्भवती प्लांटेशन वर्कर अंबिली की हत्या के मामले में अदालत ने 63 वर्षीय मैथ्यू देवस्या को उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने अपने अवैध संबंध और गर्भावस्था की बात छिपाने के लिए महिला का गला घोंटकर हत्या की और शव को तालाब में फेंक दिया। प्रत्यक्षदर्शी नहीं होने के बावजूद परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर अदालत ने उसे दोषी ठहराया। थोडुपुझा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सानू एस. पनिकर ने मैथ्यू देवस्या को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
अफेयर छिपाने के लिए ले ली जान
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि अपने संबंध का खुलासा होने और बदनामी से बचने के लिए आरोपी ने अंबिली की हत्या करने की योजना बनाई। इसके लिए उसने प्लास्टिक की रस्सी और तिरपाल का इंतजाम किया और अंबिली को पम्पाडुमपारा इलाके के पास मिलने के लिए बुलाया। वहां पहुंचने के बाद वह उसे पास के एक कॉफी बागान में ले गया।
आरोपी अंबिली को कॉफी बागान के एक सुनसान हिस्से में ले गया। जहां उसने प्लास्टिक की रस्सी से उसका गला घोंट दिया। उस समय अंबिली आठ महीने की गर्भवती थी। हत्या के बाद आरोपी ने उसके शव को तिरपाल में लपेटा, पत्थरों से बांधा और पास के एक तालाब में फेंक दिया।
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तालाब में मिली थी लाश
अंबिली के घर नहीं लौटने पर उसके माता-पिता ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस उसकी तलाश कर ही रही थी कि इसी दौरान देवस्या ने आत्महत्या करने की कोशिश की। हत्या के कई दिन बाद पम्पाडुमपारा कॉफी बागान में काम करने वाले लोगों ने पास के तालाब में बदबूदार नीला तिरपाल देखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तिरपाल बाहर निकाला तो उसमें एक महिला और एक बच्चे के शव मिले। बच्चे की गर्भनाल अभी भी महिला के शरीर से जुड़ी हुई थी। अंबिली के माता-पिता ने शव की पहचान अपनी बेटी के रूप में की और डीएनए जांच से भी इसकी पुष्टि हो गई।
जांच में सामने आया कि देवस्या ही बच्चे का पिता था जिसके बाद पुलिस ने उसे उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सरकारी वकील एस.एस. सनीश ने बताया कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था लेकिन अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने स्पष्ट और सटीक परिस्थितिजन्य तथा वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए। इन्हीं सबूतों के आधार पर अदालत ने देवस्या को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
