केरल में नई सरकार बने अभी तीन महीना भी नहीं हुआ है। राज्य के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के खिलाफ 8 साल पुराने एक केस को बंद कर दिया गया है। यह भ्रष्टाचार का एक मामला था जिसमें विजिलेंस एंड ऐंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) की जांच चल रही थी। गुरुवार को केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने बताया कि इस मामले में वी डी सतीशन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। उन्होंने आरोप भी लगाए हैं कि पिछली लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट (LDF) सरकार ने सीबीआई जांच कराने का फैसला राजनीतिक कारणों से लिया था। इस पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के स्टेट सेक्रेटरी एम वी गोविंदन ने कहा है कि एक वीडियो सामने आया था जिसमें देखा गया था कि वीडी सतीशन ने विदेश जाकर फंड के लिए अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा है कि रमेश चेन्निथला की बातों से ऐसा लग रहा है कि जांच को बंद करने में जल्दबाजी की गई है।
केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि सतर्कता विभाग की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे वी डी सतीशन का संबंध विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के कथित उल्लंघन या प्रोजेक्ट में किसी अन्य अनियमितता से जोड़ा जा सके। यह प्रोजेक्ट वी डी सतीशन के विधानसभा क्षेत्र परावुर में साल 2018 की बाढ़ से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए शुरू की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि जांच में पाया गया है कि सतीशन किसी भी वित्तीय लेनदेन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थे और न ही जांच में उनके खिलाफ कोई सबूत मिला है।
लेफ्ट सरकार पर लगाए आरोप
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद सतीशन को क्लीन चिट दिए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए रमेश चेन्निथला ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से सतर्कता जांच के नतीजों और VACB निदेशक की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच से यह साबित हुआ है कि सतीशन मामला दर्ज करने के समय नेता प्रतिपक्ष थे और उनका इस परियोजना से जुड़े किसी भी वित्तीय लेन-देन से कोई संबंध नहीं था और सभी लेन-देन मनापट्टू फाउंडेशन के खातों के जरिए किए गए थे।
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उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली लेफ्ट सरकार ने मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश करने का फैसला राजनीतिक कारणों से किया था। बता दें कि इसी साल जनवरी में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में VACB ने पुनर्जनी पुनर्वास परियोजना के लिए विदेश से लिए गए चंदे में हेराफेरी करने के आरोप लगाते हुए सतीशन के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। सतर्कता विभाग की जांच में FCRA के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इसमें कहा गया था कि सतीशन ने केंद्र से निजी यात्रा की अनुमति लेने के बाद विदेश यात्रा की और वहां चंदा जमा किया, जिसे बाद में केरल के खातों में अंतरण किया गया।
लेफ्ट ने किया पलटवार
इस मामले पर CPM नेता एम वी गोविंदन ने कहा है, 'एक वीडियो आया था जिसमें देखा गया कि वी डी सतीशन विदेश गए और फंड के लिए अपील की। इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए कि किन लोगों ने पैसे दिए और कुल कितने पैसे इकट्ठा किए गए। यह भी सामने आया था कि 22,500 पाउंड विदेश में इकट्ठा किए गए थे। यह भी सामने आया था कि ये पैसे मनापट्टू फाउंडेशन के खाते में जमा कराए गए थे और सतीशन ने खुद कहा था कि यही फाउंडेशन इन पैसों के लेन-देन के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में यह तो स्पष्ट है कि विदेश से पैसे जुटाए गए और इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली गई। यह बेहद गंभीर मामला है और यह बहुत अजीब है कि खुद गृहमंत्री क्लीन चिट दे रहे हैं। रमेश चेन्निथला की बातों से ऐसा लग रहा है जैसे एक स्वतंत्र जांच को बहुल जल्दबादी में बंद कर दिया गया।'
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आखिर क्या है मामला?
VACB ने पहले अपनी जांच में पाया था कि पुनर्जानी प्रोजेक्ट (2018 से 2022) के बीच मनापट्टू फाउंडेशन के FCRA अकाउंट में जमा हुए थे। आरोप थे कि ये पैसे सतीशन ने पुनर्जानी प्रोजेक्ट के नाम पर कई देशों से इकट्ठा किए। विजिलेंस विभाग ने यह भी माना है जब विदेश फंड जुटाने संबंधी दस्तावेज मांगे गए तो मनापट्टू फाउंडेशन कोई कागज नहीं दे पाया जो कि FCRA के नियम 19 का उल्लंघन है।
इतना ही नहीं, जांच अधिकारियों ने यह भी कहा था कि फाउंडेशन के बैंक खाते में जमा हुए पैसों और उनके समर्थन में दिए गए कागज में भी गड़बड़ी पाई गई थी। जब जनवरी 2026 में विजिलेंस ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी तब वी डी सतीशन ने कहा था कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
