मध्य प्रदेश के एक चर्चित आय से अधिक संपत्ति मामले में अब एक नया और हैरान कर देने वाला मोड़ सामने आया है। यह केस करीब 14 साल पुराना है और अब इस केस में लोकायुक्त ने खुद अपनी ही जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में लोकायुक्त की ओर से कहा गया कि शुरुआती जांच में आय का सही आकलन नहीं हो सका था। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से अपील की कि उस जांच रिपोर्ट को अंतिम नहीं माना जा सकता। यह मामला डॉक्टर अमरनाथ मित्तल से जुड़ा हुआ है। 

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला साल 2012 का है, जब लोकायुक्त पुलिस ने 10 मई 2012 को डॉक्टर अमरनाथ मित्तल के भोपाल स्थित आवास पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान नकदी, सोने-चांदी के  आभूषण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई थी। उस समय जांच एजेंसी ने लगभग 1.4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का दावा किया था।

 

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जांच में क्या सामने आया था?

इस मामले में करीब आठ साल की जांच के बाद 15 दिसंबर 2020 को लोकायुक्त ने क्लोजर रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण मामले को बंद किया जा रहा है। हालांकि, बाद में इस रिपोर्ट को कोर्ट में चुनौती दी गई।

फिर से जांच

मामले की सुनवाई के दौरान 9 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने लोकायुक्त की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और मामले की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने जांच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए और कहा कि उपलब्ध तथ्यों का नए सिरे से जांच की जाए। 

कैसे बदला लोकायुक्त का रुख?

डॉक्टर अमरनाथ मित्तल ने अदालत में आवेदन देकर छापे के दौरान जब्त की गई संपत्ति वापस लौटाने की मांग की। उन्होंने करीब 65.78 लाख रुपये के जेवर, 38.50 लाख रुपये की नकदी और अन्य जब्त सामान लौटाने का अनुरोध किया। उनका तर्क था कि मामला 14 साल पुराना हो चुका है और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद जब्त सामान वापस मिलना चाहिए। इसके बाद मामला बदल गया। 

 

इस आवेदन पर सुनवाई के दौरान लोकायुक्त ने अदालत में नया पक्ष रखा। एजेंसी ने कहा कि शुरुआती जांच में आय की सही गणना नहीं हो सकी थी और इसी वजह से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी। अब जब हाईकोर्ट ने दोबारा जांच के आदेश दिए हैं तो संपत्ति लौटाना उचित नहीं होगा।

अपनी ही रिपोर्ट पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान लोकायुक्त की ओर से कहा गया कि पहले की जांच में कई वित्तीय पहलुओं का पूरा मूल्यांकन नहीं किया गया था। एजेंसी का कहना है कि अब नए सिरे से जांच की जा रही है और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक जब्त संपत्ति वापस नहीं की जा सकती। लोकायुक्त के नए रुख को देखते हुए अदालत ने डॉक्टर अमरनाथ मित्तल की जब्त संपत्ति लौटाने की मांग वाला आवेदन खारिज कर दिया। कोर्ट का मानना था कि जब मामले की दोबारा जांच जारी है, तब इस स्तर पर जब्त सामग्री लौटाना उचित नहीं होगा।

 

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14 साल से लटका है केस

करीब डेढ़ दशक पुराने इस मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। जिस जांच के आधार पर लोकायुक्त ने पहले क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, अब उसी जांच को अधूरा बताते हुए दोबारा जांच की जा रही है। ऐसे में मामले की आगे की सुनवाई और नई जांच के नतीजों पर सभी की नजर रहेगी। इस बीच लोकायुक्त ने जिस तरह से अपना रुख बदला ही उसकी वजह से मामला सुर्खियों में है। इसके साथ ही इस तरह के मामलों में कई सालों तक जांच प्रक्रिया अटके रहने पर भी सवाल उठते हैं।