उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से शिक्षा विभाग को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां फर्जी डिग्री के आधार पर करीब 10 वर्षों तक सरकारी नौकरी करने वाले सहायक शिक्षक का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन में दस्तावेज फर्जी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और अब तक लिए गए पूरे वेतन की रिकवरी करने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

 

जानकारी के मुताबिक, जामो ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रानीपुर में तैनात सहायक शिक्षक सत्य प्रकाश मिश्र की नियुक्ति वर्ष 2016 में 15 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत हुई थी। नियुक्ति के बाद से ही उनके शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर विभाग को शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया।

 

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विश्वविद्यालय की जांच में खुली फर्जीवाड़े की परत

शिक्षा विभाग ने शिक्षक के दस्तावेजों का सत्यापन संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से कराया। विश्वविद्यालय की अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि नौकरी के समय जमा किए गए शैक्षणिक दस्तावेज विश्वविद्यालय के मूल अभिलेखों से मेल नहीं खाते और डिग्री पूरी तरह फर्जी है।

 

फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने वर्ष 2025 और 2026 के दौरान कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए। शिक्षक को मूल दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का अवसर भी दिया गया लेकिन वह कोई प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और न ही संतोषजनक जवाब दे पाया।

 

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बर्खास्तगी के साथ होगी वेतन की रिकवरी

सभी तथ्यों की पुष्टि होने के बाद बीएसए ने सत्य प्रकाश मिश्र को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने और पिछले करीब 10 वर्षों में लिए गए पूरे सरकारी वेतन की रिकवरी करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की जांच आगे भी जारी रहेगी और यदि किसी अन्य कर्मचारी के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए तो उसके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी।