मराठा आरक्षण को लेकर 20 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे-पाटील ने अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए 3 महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा था कि वह गुरुवार दोपहर मुंबई पहुंचकर आंदोलन करेंगे। रास्ते में कोई उन्हें रोके तो मराठा समुदाय के लोग भी राजधानी पहुंच जाएं।

मनोज जरांगे-पाटील अपने अनशन के 19वें दिन बुधवार रात में पटोडा पहुंचे और वहीं रुक गए। डॉक्टरों ने गंभीर डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से तुरंत इलाज की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि वे किसी की नहीं सुनने वाले थे। नारायणगढ़ के कुछ साधु-संतों ने उनसे अनशन तोड़ने की अपील की थी। 

यह भी पढ़ें: मराठाओं की मांग मानी तो OBC भड़के, महाराष्ट्र में एक और आंदोलन होगा?

अनशन क्यों तोड़ बैठे मनोज जरांगे?

मनोज जरांगे की तबीयत खराब हो गई थी। वह डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर और लो शुगर की मुश्किलों से जूझ रहे थे। सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे बात की थी। सातारा-कोल्हापुर-औंध गजट लागू करने का वादा कथित तौर पर किया गया है। अब मनोज जरांगे ने सरकार को तीन महीने का अल्टीमेटम देते हुए अनशन स्थगित किया है।

कब दोबारा मुंबई घेरेंगे मनोज जरांगे?

पटोडा में ही रातभर मनोज पाटिल रुके और अगले दिन मुंबई जाने की बात कही। उन्होंने मराठा समुदाय को मुंबई आने की कोई तारीख नहीं बताई। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से नया प्रस्ताव आ सकता है, इसलिए अभी तारीख नहीं बताएंगे। 

 

 

यह भी पढ़ें: खत्म होगा मराठा आंदोलन? जरांगे ने कहा- सरकार ने मानी सारी मांग

क्या चाहते हैं मनोज जरांगे पाटिल?

मनोज जरांगे पाटिल यह भी कहा कि उन्हें मुंबई में घुसने से कोई रोकेगा तो वह पूरे मराठा समाज को बुला लेंगे। मनोज जरांगे-पाटिल की मुख्य मांग यह है कि मराठाओं को कुनबी जाति प्रमाण पत्र मिले, जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके।

किन मांगों पर नहीं बन पा रही है सहमति?

मनोज जरांगे पाटिल मराठा समाज के लिए कुणबी प्रमाणपत्र और ओबीसी आरक्षण की मांग पर अड़े हुए हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग है कि मराठों को तुरंत कुणबी प्रमाणपत्र दिए जाएं। वह चाहते हैं कि हैदराबाद गजेट के मुताबिक मराठवाड़ा में प्रमाणपत्र बांटे जाएं, सातारा-कोल्हापुर-पुणे जैसे पुराने संस्थानों के गजेट पर 1994 जैसा सरकारी आदेश निकाला जाए और सगे-संबंधियों को भी प्रमाणपत्र मिले। 

 

आंदोलनकारियों के सभी मामले वापस लिए जाएं, आंदोलन में जान गंवाने वाले परिवारों को सरकारी नौकरी मिले, सारथी की बंद योजनाएं फिर चले, लंबित पैसा जारी हो, प्रमाणपत्रों की वैधता तय हो और मराठा उपसमिति खत्म कर अलग मंत्रालय बनाया जाए।