सीमा पार बैठे साइबर ठग और यहां बैठे उनके सहयोगी मिलकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे थे। पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से आए क्यूआर कोड को आगे बढ़ाकर देशभर में 37 लाख 40 हजार रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का जमुई पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। तकनीकी शाखा और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने टाउन थाना क्षेत्र के दौलतपुर गांव से गिरोह के एक अहम सदस्य वीरू कुमार को गिरफ्तार किया है। एसपी विश्वजीत दयाल के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड भी बरामद किए हैं। मोबाइल की जांच में जो खुलासे हुए हैं उसने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं।
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क्यूआर कोड ही था ठगी का हथियार
डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ने बताया कि गिरफ्तार वीरू सुरेश मंडल का बेटा है । वह दौलतपुर गांव का रहने वाला है। गुप्त सूचना मिली थी कि वह साइबर ठगी के पैसे को आगे पहुंचाने का काम करता है। इसी आधार पर छापेमारी कर उसे पकड़ा गया। जब पुलिस ने वीरू के मोबाइल को खंगाला तो उसमें कई फर्जी ट्रांजेक्शन, बैंक स्टेटमेंट और ढेर सारे क्यूआर कोड मिले। जांच में सामने आया कि ये सभी क्यूआर कोड म्यूल खातों यानी किराए के बैंक खातों के थे। साइबर ठग लोगों से ठगी की रकम इन्हीं खातों में जमा कराते थे और फिर उसे आगे ट्रांसफर कर देते थे। वीरू के बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 37 लाख 40 हजार रुपये की ठगी की शिकायतें दर्ज हैं। इसके अलावा कई संदिग्ध एकाउंट नंबर भी मिले हैं। पुलिस का मानना है कि यह रकम और भी ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई मामले अभी सामने नहीं आए हैं।
पाकिस्तान से आते थे नंबर
पूछताछ में वीरू ने जो बताया उसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। उसने बताया कि उसे पाकिस्तान के मोबाइल नंबरों से लगातार क्यूआर कोड भेजे जाते थे। ये नंबर वॉट्सऐप और दूसरे मैसेजिंग ऐप के जरिए उस तक पहुंचते थे। वीरू का काम सिर्फ इतना था कि उन क्यूआर कोड को आगे उन लोगों तक पहुंचाना जो ठगी की रकम जमा कराते थे। रकम जमा होते ही उसकी रसीद वापस उसी पाकिस्तानी नंबर पर भेज दी जाती थी। इस पूरी चेन में उसका एक सहयोगी हरियाणा में भी रहता है। पुलिस को अब तक इस ठगी में तीन लोगों की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। डीएसपी अभिषेक कुमार ने बताया कि वीरू इस गिरोह में पैसे को ठिकाने लगाने वाली चेन का अहम मोहरा था। सरगना पाकिस्तान में बैठकर पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था और यहां वीरू जैसे लोग उनकी मदद कर रहे थे।
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मोबाइल बना सबूतों का खजाना
पुलिस ने जब वीरू का मोबाइल जब्त किया तो उसमें ठगी से जुड़े कई पुख्ता सबूत मिले। अलग-अलग बैंकों के म्यूल एकाउंट के क्यूआर कोड, फर्जी यूपीआई ट्रांजेक्शन की डिटेल और बैंक स्टेटमेंट की फोटो उसमें सेव थी। साइबर टीम अब इन सबूतों के आधार पर उन खातों और लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जिनके नाम पर ये खाते खोले गए थे।पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले ओटीपी और लिंक भेजकर ठगी होती थी, अब क्यूआर कोड के जरिए लोगों को शिकार बनाया जा रहा है। पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे इस गिरोह ने देशभर में जाल फैला रखा था।
फिलहाल वीरू से साइबर थाने में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस उससे यह जानने की कोशिश कर रही है कि वह इस गिरोह के संपर्क में कैसे आया, अब तक कितने लोगों तक क्यूआर कोड पहुंचाए और कितनी रकम इधर-उधर की गई। डीएसपी ने कहा कि वीरू के बयान और मोबाइल से मिले डेटा के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। हरियाणा में बैठे उसके सहयोगी और पाकिस्तान में बैठे सरगना तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर से आए क्यूआर कोड को स्कैन न करें। अगर कोई इनाम, रिफंड या सरकारी सहायता के नाम पर क्यूआर कोड भेजे तो तुरंत उसकी सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
