बिहार के पटना में सहायक प्राध्यापक बहाली, डोमिसाइल नीति और 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा को लेकर विरोध आंदोलन चल रहा है। शिक्षक अभ्यर्थियों के आंदोलन को अब सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव का साथ मिल गया है।  पूर्णिया सांसद एक दिवसीय उपवास में शामिल हुए और आंदोलनरत युवाओं से मुलाकात कर उनकी मांगों का खुलकर समर्थन किया। पप्पू ने साफ कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि बिहार के लाखों युवाओं के भविष्य की है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर मांगों पर जल्द बातचीत नहीं हुई तो यह संघर्ष और व्यापक होगा।

 

पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचकर सांसद पप्पू यादव ने सबसे पहले सोनू पटेल के नेतृत्व में 13 दिन से उपवास पर बैठे अभ्यर्थियों से बात की थी। उन्होंने सरकार से तीन प्रमुख मांगें मानने की बात कही। पहली सहायक प्राध्यापक बहाली में यूजीसी रेगुलेशन 2018 के टेबल 3A को लागू किया जाए। दूसरी बिहार में डोमिसाइल नीति प्रभावी की जाए ताकि बाहर के लोगों की जगह राज्य के युवाओं को मौका मिले। तीसरी 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से आयोजित की जाए। पप्पू यादव ने कहा कि रोजगार और भर्ती प्रक्रिया बिहार के युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ी है। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत अभ्यर्थियों से संवाद करना चाहिए।

 

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पप्पू यादव का आरोप

पप्पू यादव ने सरकार के रवैये पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि बिहार में हर तरफ अराजकता है और शिक्षक अभ्यर्थियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। शिक्षा मंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि बीपीएससी परीक्षा यूपीएससी की तर्ज पर होगी। लेकिन एक सामान्य परीक्षा भी बिना पेपर लीक और विवाद के नहीं करा पा रही। जो लोग सवाल उठाने वालों को ज्ञान दे रहे हैं, पहले उन्हें भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 13 दिन से अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने यह सवाल खड़ा किया कि क्या सरकार किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है?

 

सांसद ने कहा कि युवाओं के रोजगार का मुद्दा उनके लिए सबसे ऊपर है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल भी मानते हैं कि बच्चों और युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं हो सकता। पप्पू यादव ने कहा कि यदि अपनी सरकार में भी युवाओं के खिलाफ फैसला होगा तो उसके खिलाफ भी आवाज उठेगी। हमारा मकसद सिर्फ सरकार बनाना नहीं, बल्कि बिहार के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना है। उन्होंने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि वह इस लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।

 

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आज उपवास, आगे आंदोलन और बड़ा होगा

सांसद ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम एक दिवसीय उपवास तक सीमित है। अगर सरकार ने बात नहीं मानी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को सहायक प्राध्यापक बहाली, डोमिसाइल और बीपीएससी के मुद्दे पर स्पष्ट और पारदर्शी फैसला लेना होगा। युवाओं का भरोसा भर्ती प्रक्रिया पर बना रहना चाहिए क्योंकि इससे उनका पूरा भविष्य जुड़ा है। पप्पू यादव ने सरकार से अपील की कि वह युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय सुने और समय रहते समाधान निकाले।ृ

अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद

सांसद को अपने बीच पाकर आंदोलनकारी उत्साहित दिखे। सोनू पटेल ने कहा कि अब तक सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया है। सांसद के समर्थन से उन्हें उम्मीद है कि सरकार अब बात करेगी। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। पप्पू यादव के मैदान में उतरने के बाद अब सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। पहले से ही छात्र संगठन और विपक्ष इस मुद्दे को उठा रहे हैं।