बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह अब तक कोई विधानसभा चुनाव नहीं हारे हैं। 2005 में पहली बार चुनाव लड़ने वाले अनंत सिंह मोकामा से लगातार छह बार विधायक चुने गए हैं। विधान परिषद चुनाव में सीधे तौर पर उनकी कोई हिस्सेदारी नहीं थी लेकिन जेडीयू नेता नीरज कुमार से अपनी पुरानी सियासी लड़ाई के चलते उन्होंने इस चुनाव को अपनी साख की लड़ाई बना लिया था। उन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार किया। नतीजे आने के बाद उनके समर्थन वाले उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा है।

 

इस चुनाव के दौरान अनंत सिंह को कई राजनीतिक और व्यक्तिगत झटके लगे। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। बिहार सरकार ने उनकी पत्नी नीलम देवी को सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया। जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म करने की मांग भी की है। ऐसे में सवाल उठता है कि नीरज कुमार को हराने की कोशिश में अनंत सिंह ने इस विधान परिषद चुनाव में क्या-क्या खोया है।

नीरज कुमार को हटाने की थी जिद

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक लड़ाई पुरानी है। इस लड़ाई की शुरुआत करीब 11 साल पहले हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ गठबंधन कर लिया था। इस फैसले से नाराज अनंत सिंह ने जेडीयू छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने मोकामा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। जेडीयू ने उनके खिलाफ नीरज कुमार को मैदान में उतारा। इस चुनाव में नीरज कुमार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि जेल में रहते हुए भी अनंत सिंह जीतने में कामयाब रहे।

 

इस सियासी लड़ाई का दूसरा बड़ा मोड़ अगस्त 2019 में आया। पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक गांव लदमा में छापा मारा। इस दौरान एके-47 राइफल, 26 कारतूस, एक मैगजीन और दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए। इसके बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। अनंत सिंह ने आरोप लगाया था कि इस कार्रवाई के पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी।

 

अब इस लड़ाई का एक और दौर 2026 के विधान परिषद चुनाव में देखने को मिला। पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार एक बार फिर चुनाव जीतना चाहते थे। वहीं, अनंत सिंह ने उन्हें चुनौती देने के लिए जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया। इस बार भी दोनों के बीच पुरानी सियासी अदावत चुनावी मुकाबले के केंद्र में रही।

 

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पत्नी को भी सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस

पार्टी से निष्कासन के दो दिन बाद अनंत सिंह को एक और झटका लगा। 26 अक्टूबर को बिहार सरकार ने उनकी पत्नी नीलम देवी को पटना के मॉल रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने का नोटिस दिया। यह आवास उन्हें राज्य स्तरीय 20 सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की सदस्य होने के कारण मिला था। इस पद के साथ उन्हें उपमंत्री का दर्जा भी प्राप्त था।

 

सरकार ने समिति में नीलम देवी का नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद उन्हें सरकारी आवास खाली करने का आदेश जारी किया गया। नोटिस के मुताबिक उन्हें 25 नवंबर तक बंगला खाली करना है। उधर जेडीयू ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है।

 

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अब कैंडिडेट भी हारा

अनंत सिंह ने नीरज कुमार को चुनौती देने के लिए जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस चुनाव में उनकी नजर नीरज कुमार को हराने पर थी। लेकिन नतीजे उनके पक्ष में नहीं आए और अनुज सिंह को हार का सामना करना पड़ा।

 

पटना स्नातक सीट पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और 27 अक्टूबर से मतगणना शुरू हुई। अनंत सिंह के समर्थक जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे थे, उनके आवास पर मिठाईयां बन रहीं थी। अनंत सिंह भी अपनी जीत का दावा कर रहे थे। लेकिन नतीजों में नीरज कुमार ने बाजी मार ली। इस तरह अनंत सिंह जिस उम्मीदवार के समर्थन में उतरे थे, वह चुनाव नहीं जीत सका। चुनाव के बाद अनंत सिंह को यह महसूस हो रहा होगा कि उन्होंने बिना स्टेक वाले विधान परिषद के चुनाव में हाथ-पैर मार कर गलती कर दी।