बिहार के पटना में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। ट्रांसपोर्ट नगर इलाके से साइबर थाना की टीम ने तीन साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से जदयू का झंडा लगी एक फॉर्च्यूनर गाड़ी भी बरामद की गई है। आरोपियों पर बंगाल के एक कारोबारी से कंपनी के नाम पर करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

 

पटना पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई सेंट्रल साइबर सिक्योरिटी यूनिट (CCSU) से मिले इनपुट के आधार पर की गई है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गौरव, आदर्श और अमन राज के रूप में हुई है। इनमें गौरव को गिरोह का सरगना बताया जा रहा है।

 

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ढाई करोड़ की ठगी

डीएसपी साइबर संगीता ने बताया कि बंगाल के एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कंपनी के नाम पर उससे करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी की गई है। पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर पैसे वसूले गए थे। शिकायत मिलने के बाद सीसीएसयू पटना की टीम ने तकनीकी जांच शुरू की।

 

जांच के दौरान पता चला कि ठगी का तार पटना के ट्रांसपोर्ट नगर से जुड़ा है। लोकेशन ट्रेस होने के बाद साइबर थाना की टीम ने ट्रांसपोर्ट नगर में छापेमारी की और तीनों आरोपियों को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। मौके से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक के दस्तावेज, फर्जी कंपनी के कागजात और एक फॉर्च्यूनर गाड़ी बरामद की गई। गाड़ी पर जदयू का झंडा लगा हुआ था।

डिजिटल अरेस्ट से ठगी

पुलिस की पूछताछ में साइबर ठगी का तरीका सामने आया है। आरोपी डिजिटल अरेस्ट और APK फाइल भेजकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। पहले वह खुद को कस्टम अधिकारी, सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताते थे। इसके बाद वीडियो कॉल कर पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट करने का डर दिखाते थे।

 

पीड़ित से कहा जाता था कि उसके नाम से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स या कोई अवैध सामान मिला है। साथ ही यह भी कहा जाता था कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इससे डरकर पीड़ित उनकी बातों में आ जाता था। इसके बाद आरोपी उसे APK फाइल भेजते थे। जैसे ही पीड़ित उस फाइल को खोलता था उसका मोबाइल हैक हो जाता था और बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते थे। बंगाल के पीड़ित के साथ भी इसी तरह ढाई करोड़ रुपये की ठगी की गई।

 

गिरफ्तार आरोपियों में गौरव को गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, गौरव ने कस्टम के नाम से एक कंपनी खोलकर खुद को उसका डायरेक्टर बना रखा था। इसी कंपनी की आड़ में लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की जाती थी। गौरव ने कंपनी का रजिस्ट्रेशन भी करा रखा था ताकि लोगों को शक न हो। वह फर्जी लेटर हेड, कस्टम का लोगो और फर्जी आईडी कार्ड का इस्तेमाल करता था। आदर्श और अमन राज उसके साथ मिलकर लोगों को कॉल करते थे। तीनों पिछले कई महीनों से इस काम में लगे थे। पुलिस को शक है कि इन लोगों ने बिहार और बंगाल के कई लोगों को अपना शिकार बनाया है।

 

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नेटवर्क की तलाश

पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी गौरव जदयू का झंडा लगी फॉर्च्यूनर गाड़ी से घूमता था। गाड़ी पर पार्टी का झंडा देखकर लोग उस पर आसानी से शक नहीं करते थे। बताया जा रहा है कि टोल और पुलिस चेकिंग के दौरान वह खुद को नेता का करीबी बताता था। पुलिस ने गाड़ी को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने में जुटी है कि झंडा लगाने की अनुमति थी या इसे फर्जी तरीके से लगाया गया था। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल ठगी के लिए किया था या नहीं।

 

फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस साइबर ठगी से जुड़े दूसरे लोगों का पता लगाने में जुटी है। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मोबाइल और लैपटॉप को FSL जांच के लिए भेजा जा रहा है। साइबर डीएसपी ने बताया कि आरोपियों के पास से कई अहम सुराग मिले हैं। उनके मोबाइल में कई लोगों के बैंक डिटेल और आधार-पैन की फोटो मिली है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क बंगाल, झारखंड और दिल्ली तक फैला हो सकता है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।